नई दिल्ली-विदेश में अपना सामान बेचने की चाह रखने वाले छोटे कारोबारियों और MSME के लिए एक्सपोर्ट का रास्ता अब पहले से आसान हो सकता है। सरकार ने इन्वेंट्री आधारित सीमा-पार ई-कॉमर्स निर्यात के लिए नया ढांचा लागू किया है। इसमें कारोबारियों को विदेश भेजे जाने वाले सामान की कागजी कार्रवाई, कस्टम प्रक्रिया और लॉजिस्टिक्स जैसी कई जिम्मेदारियां खुद संभालने की जरूरत नहीं होगी। इन कामों की जिम्मेदारी रजिस्टर्ड Exporter-on-Record (EOR) संभालेगा।सरकार ने यह ढांचा 5 अगस्त 2026 को अधिसूचना और सार्वजनिक सूचना के जरिए लागू किया है। इसका मकसद भारत में बने या तैयार किए गए सामान के सीमा-पार ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा देना है।
नए ढांचे में EOR एक पंजीकृत निर्यातक के तौर पर काम करेगा। विदेश से पक्का ऑर्डर मिलने के बाद EOR भारतीय Seller-on-Record (SOR) से सामान खरीदेगा और उसे अपने नाम से विदेश भेजेगा। यानी भारतीय कारोबारी का सामान विदेशी ग्राहक तक पहुंचाने की निर्यात प्रक्रिया में EOR एक महत्वपूर्ण कड़ी होगा।
विदेश में सामान बेचते समय कारोबारियों के सामने सिर्फ ग्राहक ढूंढने की चुनौती नहीं होती। निर्यात दस्तावेज, कस्टम प्रक्रिया, विदेशी बाजार के नियम और उत्पाद से जुड़ी मंजूरियां भी कारोबार का हिस्सा होती हैं। नए ढांचे में EOR इन कामों की जिम्मेदारी ले सकेगा। इसमें निर्यात दस्तावेज, कस्टम औपचारिकताएं और गंतव्य देश के नियामकीय नियमों का पालन शामिल है।
EOR की भूमिका सिर्फ सामान को विदेश भेजने तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार के मुताबिक EOR उत्पाद परीक्षण और प्रमाणन, पैकेजिंग, लेबलिंग, ऑर्डर पूरा करने की प्रक्रिया, लॉजिस्टिक्स और रिवर्स लॉजिस्टिक्स की जिम्मेदारी भी संभाल सकता है। यानी छोटे कारोबारी के लिए विदेशी बाजार में बिक्री का सबसे मुश्किल हिस्सा काफी हद तक एक संगठित निर्यात व्यवस्था के जरिए संभाला जा सकेगा।
नए ढांचे में एक अहम सुरक्षा प्रावधान भी है। निर्यात के लिए सामान की खरीद पक्के विदेशी ऑर्डर के आधार पर ही की जा सकेगी। इसका मतलब यह है कि सिर्फ अनुमान के आधार पर विदेश भेजने के लिए सामान का बड़ा स्टॉक तैयार करने की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने निर्यात के लिए सट्टा आधारित इन्वेंट्री तैयार करने पर रोक लगा रखी है।
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