नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। संसद व राज्य विधायिकाओं में महिलाओं के पर्याप्त प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर देते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि विधायी निकायों में प्रतिनिधित्व की अनुपस्थिति में महिला सशक्तीकरण असंभव है।
राष्ट्र के निर्माण में महिला कानून निर्माताओं की भूमिका (महिला जन प्रतिनिधि : सशक्त भारत की निर्माता) पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति ने यहां कहा, “यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम संसद में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मुहैया नहीं करा पा रहे हैं।”
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की पहल करने और महिलाओं का सच्चे रूप में सशक्तीकरण करने के उनके समर्पण की सराहना की।
उन्होंने कहा कि देश व समाज का संपूर्ण विकास सुनिश्चित करने की दिशा में भारत को स्त्री शक्ति की पहचान करनी चाहिए और उसे उत्साहित करना चाहिए और ऐसा केवल संसद व राज्य विधानसभाओं में उन्हें प्रतिनिधित्व देकर ही संभव है।
उन्होंने कहा, “सही प्रतिनिधित्व के बिना महिलाओं का सशक्तीकरण कैसे हो सकता है।”
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