नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। राज्यसभा में सोमवार को हंगामे पर नाराजगी जाहिर करते हुए सभापति एम.हामिद अंसारी ने व्यवधान पैदा करने के लिए सांसदों को नसीहत दी। उन्होंने कहा कि हंगामे की वजह से अन्य सदस्य निर्धारित अवधि के दौरान प्रश्न नहीं पूछ पाते।
अंसारी ने सांसदों से सवाल किया कि क्या प्रश्नकाल एवं शून्यकाल के दौरान सांसदों द्वारा निजी हित के मुद्दे उठाना उचित है? क्योंकि प्रश्नकाल और शून्यकाल प्रासंगिक मुद्दे उठाने के लिए हैं।
अंसारी ने कहा, “सामान्य तौर पर शून्यकाल के दौरान 10-12 सदस्य मुद्दे उठाते हैं। प्रश्नकाल के दौरान कोई 30-36 सांसद प्रश्न पूछते हैं। इस तरह प्रत्येक दिन 45 सदस्य प्रश्न पूछते हैं।”
अंसारी ने सदस्यों से पूछा, “क्या शून्यकाल या फिर प्रश्नकाल के दौरान किसी व्यक्तिगत सदस्य द्वारा या सदस्यों के समूह द्वारा निजी हित के मुद्दे उठाना उचित है?”
उन्होंने सदस्यों से कहा, “हम सदन का कार्यक्रम इसलिए निर्धारित करते हैं, ताकि सदन में मौजूद सदस्यों को अधिकतम लाभ दिया सके। मैंने जो कहा है, उस पर ध्यान दीजिए।”
आमतौर पर अंसारी प्रश्नकाल के दौरान सांसदों को अन्य मुद्दे उठाने की अनुमति नहीं देते। उन्होंने कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य भूपेंद्र यादव को भी सुना।
आनंद शर्मा दिन के कामकाज की सूची में दर्ज उत्तराखंड बजट के मुद्दे को उठाना चाहते थे, जिसे अंसारी ने मंजूरी नहीं दी और कहा कि इस मुद्दे को उस समय उठाइये, जब कामकाज शुरू हो।
इस बीच यादव तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय के समर्थन में खड़े हुए। वह सभापति से सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचा रहे कांग्रेस के सदस्यों के खिलाफ नियम 55 के तहत कार्रवाई करने का बार-बार आग्रह कर रहे थे। यादव ने कांग्रेस के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया।
अंसारी ने कहा कि रॉय ने यह मुद्दा उस समय उठाया था, जब उपसभापति पी.जे. कुरियन सदन की अध्यक्षता कर रहे थे, लिहाजा इस पर कुरियन ही कोई व्यवस्था देंगे।
कांग्रेस के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की, जिसके बाद अंसारी ने आधा घंटे के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
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