खास बात यह है कि इस मौके पर मुलायम-शिवपाल की नामौजूदगी में ‘काम बोलता है’ के फ्लॉप होने के बाद अब पार्टी ने एक नया नारा दिया है- ‘फिर प्रदेश का दिल जीतेंगे हम, मिलकर अपने काम से’ साथ ही अखिलेश को विधान परिषद में नेता विपक्ष चुनने का अधिकार भी दे दिया गया। खास बात एक और यह भी है कि बैठक के बाद अखिलेश यादव कार्यकर्ताओं से नहीं मिले, जिस पर घंटों से इंतजार कर रहे कार्यकर्ताओं को मायूसी हाथ लगी।
पार्टी मुख्यालय पर सुबह 10 बजे अखिलेश यादव ने पार्टी के सभी विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और बड़े पदाधिकारियों को मंथन के लिए बुलाया था। करीब एक घंटे तक चली बैठक में हार के कारणों के अलावा संगठन को मजबूत करने पर चर्चा हुई। बैठक में विधान परिषद के नेता विपक्ष का निर्णय नहीं हो सका। हालांकि अखिलेश ने विधानसभा में रामगोविंद चौधरी को नेता बना दिया है।
बैठक के बाद चौधरी ने कहा, “हम पार्टी के प्रदर्शन पर गहनता से विचार-विमर्श कर रहे हैं।”
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