नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। आवास खरीदार पहली मई से रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास), अधिनियम, 2016 के तहत राहत पाने के हकदार हो जाएंगे, लेकिन अभी तक केवल चार राज्यों एवं छह केंद्र शासित प्रदेशों ने ही इस अधिनियम को अधिसूचित किया है। ऐसे में केंद्र ने मुख्यमंत्रियों को सावधान किया है कि अगर रियल एस्टेट अधिनियम को 30 अप्रैल तक की समय सीमा में पूरा नहीं किया गया, तो इस क्षेत्र में खालीपन आ सकता है।
केन्द्रीय आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने इस संबंध में नौ फरवरी को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखे एक पत्र में आगाह किया है कि राज्य सरकारों से अधिकतम 30 अप्रैल, 2017 तक रियल एस्टेट नियामकीय प्राधिकरणों एवं अपीली न्यायाधिकरणों की स्थापना करने की अपेक्षा की जाती है।
उन्होंने कहा है, “यह समय सीमा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अधिनियम पहली मई, 2017 से पूरी तरह संचालन में आ जाएगा और नियमों एवं नियामकीय प्राधिकरण तथा अपीली न्यायाधिकरण के अभाव में अधिनियम का कार्यान्वयन आपके राज्य में प्रभावित होगा, जिससे इस क्षेत्र में खालीपन की स्थिति आ जाएगी।”
मंत्री ने दो पृष्ठों के अपने पत्र में कहा है कि इससे न केवल उपभोक्ताओं को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध होगी, बल्कि यह रियल एस्टेट क्षेत्र को भी बढ़ावा देगा, जिससे सभी हितधारकों को लाभ पहुंचेगा।
आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय (एचयूपीए) ने पिछले महीने की 17 तारीख को सभी राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों के साथ एक परामर्शदात्री कार्यशाला का आयोजन किया था, ताकि उनके द्वारा की गई प्रगति की समीक्षा की जा सके तथा इस अधिनियम के तहत उनकी जिम्मेदारियों के बारे में बताया जा सके।
अब तक जिन राज्यों ने अंतिम नियमों को अधिसूचित किया है, उनमें गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल एवं उत्तर प्रदेश शामिल हैं। मंत्रालय ने इनमें से कुछ राज्यों द्वारा अधिनियम के कुछ प्रावधानों के उल्लंघन की कुछ शिकायतें प्राप्त की हैं, जिसकी वजह से अधिनियम की भावना कमजोर पड़ गई है।
मंत्रालय ने इन शिकायतों को राज्यसभा की अधीनस्थ विधान संबंधी समिति को निर्दिष्ट कर दिया है। इस पृष्ठभूमि में नायडू ने मुख्यमंत्रियों से इस अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया, जैसा कि संसद द्वारा पारित किया गया है।
अधिनियम के प्रावधानों के तहत रियल एस्टेट संपत्ति के खरीदार एवं डेवलपर दोनों ही इस वर्ष मई से रियल एस्टेट नियामक अधिकारियों के पास जाकर अनुबंधात्मक बाध्यताओं एवं अधिनियम के अन्य प्रावधानों के उल्लंघन के मामले में एक-दूसरे के खिलाफ राहत की मांग कर सकते हैं। इसके लिए यह जरूरी है कि सामान्य नियमों और विक्रय नियमों के लिए समझौते हों, रियल एस्टेट प्राधिकरणों और अपीली न्यायाधिकरणों समेत रियल एस्टेट के सभी नियम उपयुक्त तरीके से लागू हों और अपना कार्य आरंभ करने की स्थिति में हों।
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