‘अवैध व्यापार से हिंदू कुश में वन्यजीवों को खतरा’ (विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष)

नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। अवैध वन्यजीव व्यापार और प्राकृतिक निवास स्थान के टुकड़ों में बंटने से मनुष्य और वन्यजीवों में संघर्ष बढ़ा है जिससे हिमालय के पूरे हिंदू कुश इलाके में वन्यजीवों पर खतरा मंडरा रहा है। यह जानकारी एक अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ ने दी।

नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। अवैध वन्यजीव व्यापार और प्राकृतिक निवास स्थान के टुकड़ों में बंटने से मनुष्य और वन्यजीवों में संघर्ष बढ़ा है जिससे हिमालय के पूरे हिंदू कुश इलाके में वन्यजीवों पर खतरा मंडरा रहा है। यह जानकारी एक अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ ने दी।

उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों से निपटने के लिए सीमा-पार हस्तक्षेपों की जरूरत है।

समेकित पहाड़ विकास के लिए काठमांडू स्थित अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (आईसीआईएमओडी) से जुड़े सीमा-पार भू-परिदृश्य के लिए क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक राजन कोत्रू ने आईएएनएस से कहा कि खाद्य पदार्थ, ऊन और फर, चमड़े की वस्तुओं, औषिधियों जैसे वन उत्पादों की लंबी सूची है जिनका पूरे हिंदू कुश इलाके में अवैध व्यापार होता है। इन चीजों के अवैध व्यापार में प्रजातियों को विलुप्त करने की क्षमता है।

‘सस्टेनिंग आवर वाल्डलाइफ’ शीर्षक से छपे एक लेख में उन्होंने कहा कि हिम तेंदुए की खाल और बाघों की हड्डियां सीमाओं पर लगातार तस्करों और शिकारियों से जब्त की जा रहीं हैं।

इस साल रविवार को विश्व पर्यावरण दिवस का विषय ‘गो वाइल्ड फॉर लाइफ’ है।

कोत्रू ने कहा, “अवैध व्यापार को नियंत्रित करने की समस्याओं में एक समस्या यह है कि जंगली वनस्पतियों और जीवों की विलुप्तप्राय प्रजातियों की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संधि (सीआईटीईएस) जैसे अंतर्राष्ट्रीय समझौतों और राष्ट्रीय कानूनों और इसके क्रियान्वयन की क्षमता में तारतम्य नहीं है।”

वन्यजीव व्यापार निगरानी नेटवर्क, टीआरएफएफआईसी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वन्यजीव उत्पादों का वैध वैश्विक आयात 2009 में 160 अरब डॉलर से दो गुना से अधिक बढ़कर 323 अरब डॉलर हो गया था।

कोत्रू ने सकारात्मक तस्वीर पेश करते हुए कहा कि पृथ्वी सम्मेलन के दो दशक बाद वन्यजीव संरक्षण में कुछ प्रगति हुई है।

उन्होंने कहा कि नेपाल में गैंडे का शिकार बंद हो गया है। यह एक प्रेरणादायक कदम है।

इसी तरह भारत में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है और चीन में विलुप्त हो रहे तिब्बती मृगों की अबादी में सुधार हुआ है।

कोत्रू के मुताबिक हिन्दू कुश पश्चिम में हिमालय पर्वत श्रृंखला का विस्तार है जहां कई पारिस्थितिक तंत्र हैं और इनके बीच अंतरसंबंधों का क्षरण हुआ है। साथ ही इस इलाके में प्राकृतिक निवास विखंडण भी आम बात है।

लेख के मुताबिक वन्य जीवों के प्राकृतिक निवासों के विखंडण से मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष बढ़ा है। नतीजा है कि फसलों की क्षति होती है और लोग हताहत होते हैं जिससे लोग वन्यजीवों के प्रति उदासीन हो गए हैं। यहां तक कि ग्रामीण लोग वन्यजीव संरक्षण का प्रतिरोध भी करते हैं।

इसके अलावा शहरी और ग्रामीण विकास के विस्तार से जैव गलियारे को खतरा उत्पन्न हो रहा है।

कोत्रू ने कहा, “हम जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को अधिक समय तक नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं जो जंगली जानवरों के प्रकृतिक निवासों और जल सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है।”

उन्होंने कहा, “स्थानीय लोगों को साथ लेकर सहमति उन्मुख दीर्घकालीन योजना, क्रियान्वयन और निगरानी के साथ सीमा-पार बड़े पैमाने पर सही तरीके के हस्तक्षेपों को हमें मूर्तरूप देना चाहिए।”

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493