विजयवाड़ा, 7 अगस्त (आईएएनएस)। संयुक्त आंध्र प्रदेश में शराब रोधी आंदोलन की अगुवा रहीं दुबागंता रोसम्मा का रविवार को निधन हो गया। वह 93 वर्ष की थीं।
रोसम्मा के परिजनों के मुताबिक, बीमारी के कारण आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में स्थित अपने गांव दुबागंता में उनका निधन हो गया।
उनका असली नाम वर्धिनेनी रोसम्मा था, लेकिन एक सस्ती शराब ‘अराक’ के खिलाफ उनके आंदोलन के कारण उनका गांव प्रसिद्ध हो गया, जिसके बाद वह दुबागंता रोसम्मा के नाम से मशहूर हो गई थीं।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रमुख और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता जगनमोहन रेड्डी ने रोसम्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
वर्ष 1992 में नशे में धुत्त कुछ ग्रामीणों द्वारा प्रौढ़ साक्षरता अभियान के दो कर्मचारियों को प्रताड़ित किए जाने के बाद रोसम्मा ने कुछ नव साक्षर महिलाओं के साथ मिलकर क्षेत्र में शराब रोधी आंदोलन शुरू किया था।
आंदोलन के तहत झाड़ुओं, मिर्च पाउडर और लाठियों से लैस महिलाओं ने गांव में अराक की दुकानों पर धावा बोला और उन्हें जबरन बंद करवाया था।
दुबागंता के उदाहरण से प्रेरित होकर पूरे नेल्लोर जिले की महिलाएं शराब रोधी आंदोलन में शामिल हो गई थीं।
जल्द ही आंदोलन अन्य जिलों में भी फैल गया और तत्कालीन मुख्यमंत्री के. विजयभास्कर रेड्डी को एक अक्टूबर, 1993 से अराक पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था।
हालांकि भारत निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) की बिक्री जारी रहने के कारण महिला संगठनों को पूर्ण प्रतिबंध के लिए लड़ाई लड़नी पड़ी थी।
वर्ष 1994 के चुनाव में यह एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा था और तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के प्रमुख एन.टी. रामाराव ने सत्ता में आने पर शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का वादा किया था।
वादे के मुताबिक, रामाराव ने 16 जनवरी, 1995 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी थी।
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