आईएमए का एनएमसी रोको सत्यग्रह बुधवार को

नई दिल्ली, 15 नवंबर (आईएएनएस)। आधुनिक चिकित्सा के डॉक्टरों की राष्ट्रीय संस्था इंडियन मेडिकल ऐसोसिएशन (आईएमए) की देशभर की 1700 शाखाएं 16 नवंबर को रोष प्रदर्शन करेंगी। आईएमए अपनी छह मांगों के लिए दो साल से संघर्ष कर रही है।

संस्था का कहना है कि वर्ष 2015 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने मांगें छह हफ्तों में पूरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन भूल गए।

आईएमए का एनएमसी रोको सत्यग्रह सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस पर होगा।

प्रेस वार्ता में आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एस.एस. अग्रवाल, प्रेसीडेंट इलेक्ट एंव एचसीएफआई के प्रेसीडेंट डॉ के.के. अग्रवाल और आईएमए के पूर्व प्रेसीडेंट डॉ. ए. मरतड पिल्लई ने बताया कि पूरे भारत में 16 नवंबर को 500 से ज्यादा धरने दिए जाएंगे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन होगा।

डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, “आईएमए अपनी छह मांगों के लिए दो साल से संघर्ष कर रही है। 2015 में प्रस्तावित धरना पिछले साल स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने मांगों को छह सप्ताह में माने जाने का आश्वासन दिया था। जिस पर हमने धरना स्थगित कर दिया था, लेकिन एक साल से ज्यादा समय गुजर गया है, अब तक कोई हल नहीं निकला है। हम अपनी मांगों का जवाब लेने के लिए देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे।”

आईएमए का कहना है कि प्रस्तावित नेशनल मेडिकल कमिशन बिल (एनएमसी) के खिलाफ है, क्योंकि यह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को खत्म करना चाहता है। एनएमसी का गठन एक अलोकतांत्रिक कदम है। इससे मेडिकल पेशेवर अफसरशाही और गैर-मेडिकल प्रशासकों के सामने घुटनों के बल होकर काम करेंगे। उसकी बजाय एमसीआई एक्ट में आवश्यक सुधार करके इसे पारदर्शी, जिम्मेदार और स्वयं-संतुष्ट बनाया जाए।

संस्था ने कहा कि अस्पतालों और डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। भारत के 18 प्रदेशों ने इससे सुरक्षा प्रदान के लिए कानून और ऑर्डिनेंस लागू किए हैं। आईएमए को समझ नहीं आता कि केंद्र सरकार इस के लिए केंद्रीय कानून क्यों नहीं बना सकता। वह सिर्फ यही कहती है कि वह दूसरे राज्यों को ऐसे कानून बनाने के लिए पत्र लिखेगी।

संस्था का कहना है कि आईएमए के डाक्टर वाजिब फीस में लोगों का इलाज करते हैं। आज भी आम डॉक्टर 200 से 300 रुपये में मरीज देखता है। इसलिए सिंगल डॉक्टर क्लीनिक को क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट से बाहर रखा जाए। सरकार ने आईएमए द्वारा इस एक्ट के बारे में दिए गए ज्यादातर सुझाव मंजूर कर लिए हैं, इसे भी माने जाने की अपील की जा रही है।

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