आदित्य पर छाया बॉडी स्कल्पटिंग का फितूर

मुंबई, 1 जनवरी (आईएएनएस)। फिल्म ‘वास्तव’ के संजय दत्त का गठीला बदन याद तो होगा ही या फिर सलमान खान का ‘ओ ओ जाने’ में बिना शर्ट का डांस। यही हिंदी सिनेमा के दो माइल स्टोन हैं जहां से शरीर के कसावट को अभिनेताओं ने गंभीरता से लिया। फिर ‘कहो ना प्यार है’ में रितिक रोशन और ‘गजनी’ में आमिर खान के पैक्स ने युवाओं को जिम में जाने के लिए मजबूर कर दिया। फिटनेस के लिए नहीं पैक्स बनाने के लिए।

करीब दो दशक तक चले पैक्स के मिथ को शायद आदित्य राय कपूर अब तोड़ने वाले हैं। आदित्य ने अपनी फिल्म ‘फितूर’ के लिए बॉडी स्कल्पटिंग की है, जिसके लिए आदित्य को जी तोड़ मेहनत करनी पड़ी। या यूं कहें कि फितूर सवार था, अपने आप को किरदार के अंदर डालने के लिए। पर हां एक बार उनके इस लुक को युवा दर्शक देखेंगे तो वे जरूर बॉडी स्कल्पटिंग को गंभीरता से लेंगे।

बॉडी स्कल्पटिंग यानी अपने शरीर को गढ़ना। नियमित अभ्यास और कसरत से। अमूमन इसमें शरीर के साथ ज्यादा वजनों का खेल नहीं होता जैसा कि बॉडी बिल्डिंग में होता है। देसी कसरत और दौड़ भाग, खाने में संतुलन। कश्मीरी लड़के के लुक के लिए ये जरूरी था, क्योंकि कश्मीर के युवाओं की काया पहाड़ों के कारण टोंड ही रहती है, क्योंकि कहां इन्हीं जगहों के आसपास घूमती है। ये हम नहीं सूत्र कह रहे हैं।

खैर! बात फिल्म की करें तो आदित्य के साथ पहली बार कैटरीना कैफ हैं। कद-काठी और चमड़ी दोनों की करीब समान होने से ऑन स्क्रीन इनका एपीयरेंस गजब का लग रहा है। जैसा कि आमसूत्र नाम के एक टीवीसी में देखा था। 12 मिनट के टीवीसी और करीब 2 घंटे के फिल्म में काफी अंतर होता है, जिसे दोनों ने जमकर जीया है।

आदित्य के लिए अपनी एथलेटिक काया छोड़ बॉडी स्कल्पटिंग करना आसान नहीं था। इसके लिए उन पर सही में फितूर छाया था, फितूर का मतलब एक तरीके का सनक ही होता है। इसी फितूर पर ही पूरी फिल्म ही बनी है। जिसकी झलक हमने आदित्य राय कपूर के शरीर में हुए ट्रांसफार्मेशन को देखकर लगा सकते हैं।

सूत्रों की मानें तो फिल्म वैलेंनटाइन डे के करीब रिलीज हो रही है। कश्मीर की वादियों में छाया प्रेम और उसका फितूर युवाओं के लिए ही है।

अपने बॉडी स्कल्पटिंग के बारे में आदित्य राय कपूर कहते हैं कि डायरेक्टर की डिमांड थी और उन्होंने जैसा किरदार सोचा वैसा ही मैंने खुद को ढाला। इसके लिए काफी वेट लूज करना पड़ा। वेट लूज करना ही काफी नहीं था, उसे मेनटेन करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। दिमाग में कभी पैक्स बनाने का सुरूर तो नहीं था पर बॉडी स्कल्पटिंग का फितूर जरूर चढ़ गया। कभी-कभी इरिटेशन भी होती थी, पर यह तो होता ही है, क्योंकि शरीर जो बदल रहा था। जब मनचाहे शेप में शरीर आ गया तो ‘फील गुड’ होने लगा।

यूटीवी मोशन के इस फिल्म को डायरेक्ट किया है युवा निर्देशक अभिषेक कपूर ने। फस्ट लुक में आदित्य ने पहली बाजी जीत ली है। यह शायद एक्टर-डायरेक्टर के फितूरबाजी का ही नतीजा है।

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