नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को आयोग्य घोषित किए जाने की निर्वाचन आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने रविवार को इस बात की जानकारी दी।
भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले पर खुशी जाहिर की है जबकि आप ने इस फैसले के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
कांग्रेस ने हालांकि भाजपा और चुनाव आयोग पर आप को राज्यसभा में नामांकन कराने में सहायता प्रदान करने का आरोप लगाया है।
इस मंजूरी के बाद, केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सरकार अधिनियम (जीएनसीटीडी) के तहत अयोग्य ठहराया है।
यह 20 विधायक हैं; अलका लांबा, आदर्श शास्त्री, संजीव झा, राजेश गुप्ता, कैलाश गहलोत, विजेंदर गर्ग, प्रवीण कुमार, शरद कुमार, मदन लाल खुफिया, शिव चरण गोयल, सरिता सिंह, नरेश यादव, राजेश ऋषि, अनिल कुमार, सोम दत्त, अवतार सिंह, सुखवीर सिंह दाला, मनोज कुमार, नितिन त्यागी और जनरैल सिंह।
निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को आप के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने की सिफारिश की थी। इन सभी पर बतौर संसदीय सचिव लाभ के पद पर आसीन होने के आरोप लगाए गए थे।
आयोग ने राष्ट्रपति को अपना सुझाव वकील प्रशांत पटेल की शिकायत पर दिया था। हिंदू लीगल सेल के सदस्य पटेल ने जून 2015 में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के समक्ष याचिका दाखिल की थी।
पटेल द्वारा दाखिल शिकायत में कहा गया था कि जरनैल सिंह समेत आप के 21 विधायकों को दिल्ली सरकार में मंत्रियों के लिए संसदीय सचिव नियुक्त करके संविधान का उल्लंघन किया गया है। जरनैल सिंह ने पिछले साल पंजाब विधानसभा चुनाव में भाग लेने के लिए राजौरी गार्डन सीट से इस्तीफा दे दिया था।
भाजपा की प्रदेश इकाई ने राष्ट्रपति के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को संरक्षण प्रदान करने में सहायता मिलेगी।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मीडिया सलाहकार नागेन्दर शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के मामलों की तरह यहां भी चुनाव आयोग और राष्ट्रपति के फैसले से इन्हीं संस्थाओं की प्रतिष्ठा को हानि पहुंचेगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा को किसी से फर्क नहीं पड़ता, राष्ट्रपति के पद की गरिमा का भी नहीं।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि यह निर्णय अगर जल्दी आता तो आप राज्यसभा के लिए नामांकन भी नहीं कर पाती। उन्होंने इस प्रक्रिया को एक महीने से ज्यादा समय तक लटकाने के लिए आप और भाजपा में संधि का आरोप लगाया।
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