मुंबई, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति की द्विमासिक समीक्षा के दौरान मंगलवार को उम्मीदों के मुताबिक मुख्य नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
मौजूदा वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक के दौरान रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) और वैधानिक तरलता अनुपात को अपरिवर्तित रखते हुए मौजूदा स्तरों पर ही बरकरार रखा है।
राजन ने कहा कि आरबीआई ने जनवरी से एक उदार नीति अपना रखी है, ताकि बाजार में तरलता बनी रहे। उन्होंने कहा, “आगे भी मौद्रिक नीति का रुख उदार रखा जाएगा। लेकिन मौद्रिक नीतिगत गतिविधियां आगामी आंकड़ों के आधार पर तय होंगी।”
रेपो दर 7.5 प्रतिशत पर और रिवर्स रेपो दर 6.5 प्रतिशत पर बरकरार है। वहीं, नकद आरक्षित अनुपात को चार प्रतिशत और वैधानिक तरलता अनुपात को 21.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।
रेपो दर वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी कम अवधि की जरूरतों को पूरी करने के लिए रिजर्व बैंक से ऋण लेते हैं। रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है, जो रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उनकी जमा राशि पर देता है।
सीआरआर और एसएलआर वह अनिवार्य राशि है, जिसे वाणिज्यिक बैंक ग्राहकों को ऋण देने से पहले सरकारी बांड या सोने के रूप में अपने पास रखने की जरूरत होती है। इन दरों में बदलाव से ऋण देने आदि के लिए बैंकों के पास उपलब्ध धनराशि पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
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