इंदौर-मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के सांवेर में फर्जी D.Ed और B.Ed की डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 51 शिक्षकों के खिलाफ अब केस दर्ज कराने की तैयारी है। ये शिक्षक साल 2006-07 की संविदा शाला शिक्षक भर्ती के बाद से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। करीब दो दशक की नौकरी के दौरान इनमें से कई शिक्षक प्रमोशन भी पा चुके हैं। शिक्षा विभाग अब उनकी सेवा अवधि में मिले वेतन का हिसाब जुटा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, वसूली की रकम करीब 100 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।
मामला सांवेर विकासखंड के सरकारी स्कूलों से जुड़ा है। बीते 2021 में शिकायत मिलने के बाद शिक्षकों की नियुक्ति के समय जमा किए गए D.Ed और B.Ed के दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। माध्यमिक शिक्षा मंडल से दस्तावेजों के सत्यापन की जानकारी जून 2022 से अप्रैल 2023 के बीच विभाग को मिली। इसके बाद चार प्राचार्यों की समिति बनाकर पूरे मामले की जांच कराई गई। समिति ने मई 2024 में अपनी रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंप दी।
जांच में दस्तावेजों की जांच के दौरान कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आई। समिति के मुताबिक, संविदा शाला शिक्षक परीक्षा के दौरान जमा कराई गई कुछ अंकसूचियां ऐसी थी जिन्हें माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जारी ही नहीं किया था। कुछ मामलों में एक ही रोल नंबर पर किसी दूसरे परीक्षार्थी के नाम की अंकसूची भी मिली। बाद में STF भोपाल ने भी मामले की जांच की और संबंधित डिग्रियों को फर्जी पाया।
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