देहरादून, 7 मई (आईएएनएस)। उत्तराखंड में कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के मामले में नैनीताल उच्च न्यायालय ने सोमवार तक फैसला सुरक्षित रख लिया है।
न्यायमूर्ति यू.सी. ध्यानी की एकल पीठ के समक्ष शनिवार को दोनों पक्षों की ओर से सुनवाई पूरी कर ली गई। 9 मई को सुबह 10.15 बजे फैसला सुनाया जाएगा।
शनिवार सुबह 11 बजे उच्च न्यायालय में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा कांग्रेस के नौ विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के मामले पर सुनवाई शुरू हुई। मामले में विधायकों ने न्यायालय में याचिका दायर की थी। बागियों की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सी.ए. सुंदरम और विवेक द्विवेदी पैरवी करते हुए बागियों का पक्ष रखा।
बागियों के वकील ने कहा कि विधायकों ने पार्टी के खिलाफ कोई काम नहीं किया है। कहा कि विधायकों में नेता के प्रति नाराजगी हो सकती है, इसका मतलब यह नहीं कि उनकी सदस्यता खत्म कर दी जाए।
उन्होंने कहा कि विधायकों ने हरीश रावत का विरोध किया था न कि पार्टी का। उन्होंने कोई ऐसा काम नहीं किया कि उनकी सदस्यता रद्द की जाए। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पैरवी कर रहे पूर्व कानून मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की।
गौरतलब है कि 27 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी। मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सदन अध्यक्ष से सिफारिश की थी। हरीश रावत की याचिका पर सुनवाई के बाद अध्यक्ष ने सभी नौ विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी।
ज्ञात हो कि 27 मार्च को ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।
बागी विधायकों ने सदस्यता खत्म करने के गोविंद सिंह कुंजवाल के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बागी विधायकों की ओर से मामले की जल्द सुनवाई के लिए प्रार्थना-पत्र दिया गया था, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति के बाद सात मई की तिथि सुनवाई के लिए नियत की थी।
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