देहरादून, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने को चुनौती देने वाली पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की याचिका पर सुनवाई टालने का केंद्र का आग्रह बुधवार को खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ और न्यायमूर्ति वी.के. बिष्ट की पीठ ने केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे दो अतिरिक्त महाधिवक्ताओं (एएसजी) का यह आग्रह खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सुनवाई स्थगित की जाए, क्योंकि रावत ने एक बिल्कुल नया मामला तैयार किया है।
अतिरिक्त महाधिवक्ता तुषार मेहता और मनिन्दर सिंह ने इस आधार पर स्थगन की मांग की थी कि राज्य विधानसभा द्वारा विनियोग विधेयक को कथित तौर पर पारित किए जाने के मुद्दे से पूरी तरह नए तथ्य सामने आए हैं और उन पर ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि उनका मामले की जड़ से संबंध है।
पीठ ने कहा, “हम इसे स्थगित नहीं करने जा रहे हैं। अगर आप जवाब दाखिल करना चाहते हैं तो इसे दिन में या कल तक दाखिल कर दें।” साथ ही पीठ ने कानूनी अधिकारियों को आश्वासन दिया कि जब तक केंद्र अपना जवाब दाखिल नहीं कर देता तब तक वह इस मुद्दे पर विचार नहीं करेगी। पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई गुरुवार को जारी रहेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री रावत की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने विनियोग विधेयक के मुद्दे पर अपना जवाब दाखिल करने के आधार पर मामले की सुनवाई स्थगित किए जाने के केंद्र के प्रयास का विरोध किया। विनियोग विधेयक राज्य के सालाना बजट पर एक समेकित विधान होता है, जिसे राज्य विधानसभा ने पारित घोषित कर दिया है।
बाद में सिंघवी ने पत्रकारों से कहा, “इस मामले की सुनवाई कल (गुरुवार) भी जारी रहेगी।”
गौरतलब है कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 30 मार्च को उत्तराखंड विधानसभा में होने वाले शक्ति परीक्षण पर रोक लगा दी थी। यह रोक केंद्र सरकार की याचिका के आधार पर लगाई गई थी।
एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने रावत द्वारा दाखिल याचिका पर अंतिम सुनवाई के लिए मामले को आज की तारीख में सूचीबद्घ कर दिया था। रावत ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने को चुनौती दी है।
इससे पहले 28 मार्च को रावत सरकार को विश्वास मत हासिल करना था, लेकिन केंद्र सरकार ने 27 मार्च को राज्य में संवैधानिक व्यवस्था ठप हो जाने का हवाला देते हुए राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था। रावत ने इसे उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के समक्ष चुनौती दी थी।
एकल न्यायाधीश ने 31 मार्च को सदन में शक्ति परीक्षण का आदेश देने के साथ ही नौ अयोग्य बागी कांग्रेस विधायकों को मतदान में हिस्सा लेने की अनुमति भी दी थी।
उच्च न्यायालय ने एक अप्रैल को केंद्र सरकार को रावत द्वारा दायर याचिका पर जवाब देने का आदेश दिया था। याचिका में रावत ने विनियोग विधेयक पर केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश जारी किए जाने को चुनौती दी थी। कांग्रेस ने राष्ट्रपति शासन वाले राज्य में आय-व्यय को अधिकृत करने वाले केंद्र के अध्यादेश को उच्च न्यायालय में इस तर्क के साथ चुनौती दी कि विधानसभा 18 मार्च को विनियोग विधेयक पारित कर चुकी है।
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