उप्र को स्वास्थ्य खर्च 17500 करोड़ रुपये बढ़ाने की जरूरत

नोएडा, 10 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 20 करोड़ से अधिक है। यह देश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जो कुल जनसंख्या का 16.49 फीसदी है। ऐसे में राज्य को वर्ष 2018 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च 17500 करोड़ रुपये बढ़ाने की जरूरत है।

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च (आईआईएचएमआर) के डीन डा. ए. के. अग्रवाल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उत्तर प्रदेश को 2018 तक 17500 करोड़ रुपये का स्वास्थ्य खर्च बढ़ाने की जरूरत है।

अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कुल प्रजनन दर 3.8 है, 3 साल से कम उम्र के 47.3 फीसदी बच्चों का वजन कम है। इसके अलावा, 6 से 35 महीने के बीच के 85.1 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी है और 34.1 फीसदी विवाहित महिलाओं का बीएमआई सामान्य से नीचे है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण 2014 (एनएसएसओ) के अनुसार उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाके में अस्पताल में भर्ती होने की लागत सबसे अधिक है। उत्तर प्रदेश के अस्पताल में भर्ती होने का औसत व्यय 18693 रुपये है, जहां 30.2 प्रतिश्त आबादी सरकारी अस्पतालों और 69.8 प्रतिशत निजी अस्पतालों का इस्तेमाल करता है। इस प्रकार निजी अस्पतालों में चिकित्सा के लिए लोग उच्च लागत का सामना करते हैं।

राज्य ने लगभग 16097.67 करोड़ रुपये स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक व्यय के लिए आवंटित किए जिसमें से 5840 करोड़ रुपये परिवार कल्याण परियोजनाओं, 2276 करोड़ अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के लिए, 111 करोड़ स्टेट आफ द आर्ट कैंसर संस्थान, लखनऊ के लिए आवंटित किया गया है। राज्य ने लोहिया ग्रामीण परिवहन सेवा के तहत ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय के साथ गांवों को जोड़ने के लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।

डा. अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश अपने स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में मानव संसाधन की बड़ी कमी झेल रहा है। राज्य के पास 3497 के मुकाबले 2209 डॉक्टर हैं। वर्तमान में 20521 स्वास्थ्य पेशेवर सब सेंटर पर उपलब्ध है जबकि 31200 की आवश्यकता हैं।

मानव संसाधन की यह कमी सीएचसी में भी देखी जा सकती है, जहां स्वास्थ्य पेशेवरों की संख्या 1298 की कुल जरूरत के मुकाबले 773 है और पीएचसी में 5194 की वास्तविक आवश्यकता के मुकाबले 3497 है। राज्य में केवल 484 विशेषज्ञ (सर्जन, ओ बी एंड जीवाई, फीजिसियन, बाल रोग विशेषज्ञ) हैं, जबकि ऐसे 3092 विशेषज्ञ की जरूरत है। इसके अलावा, इन अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता भी एक बड़ा प्रश्न चिह्न् खड़ा करती है।

ऐसा प्रशिक्षित और योग्य अस्पताल व स्वास्थ्य प्रबंधकों की कमी की वजह से है। इस क्षेत्र में आईआईएचएमआर, दिल्ली 2008 से महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यह एआईसीटीई से अनुमोदित दो साल के पीजीडीएचएम कार्यक्रम द्वारा प्रशिक्षित और योग्य अस्पताल व स्वास्थ्य प्रबंधकों के सात बैच निकाल चुका है। इस तरह, 500 से अधिक योग्य प्रबंधक देश के भीतर और बाहर इस अंतर को पाटने का काम कर रहे हैं।

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