उप्र : जर्जर तारों से 4 साल में 2533 मौतें

परिषद का कहना है कि वर्ष 2015-16 में कुल अग्निकांड की संख्या 262 रही, जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर फसलों का नुकसान हुआ।

गर्मी शुरू होते ही बिजली का तार टूटने व गेहूं की फसल जलने की घटनाएं आम हो जाती हैं, जिससे किसानों की मेहनत की कमाई पानी में फिर जाती है। दूसरी ओर, प्रदेश में बड़े पैमाने पर जनहानि भी हो रही है। सरकार को सर्वप्रथम जर्जर तारों को बदलने, जीआई वायर बदलने एवं लंबी स्पैन के बीच अतिरिक्त खंभे लगाने एवं सेफ्टी डिवाइस को कार्यक्षम का निर्देश बिजली कंपनियों को देना होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में लाइनें झूल रही हैं, तेज हवा चलने से आपस में टकराती है और अंतत: चिंगारी आग का रूप ले लेती हैं और फसलों के जलने व जनहानि होने की घटनाएं होती हैं।

वर्ष 2015-16 में विद्युतीय अग्निकांड पर नजर डालें, तो इसकी कुल संख्या प्रदेश में 262 रही है, जिसका मुख्य कारण विद्युत लाइनों के ढीले तारों का आपस में टकराना और चिंगारी के फलस्वरूप आग लगना। इसी तरह जनहानि की घटनाओं पर नजर डालें, तो उसमें भी बेतहाशा वृद्धि हुई है।

वर्ष 2013-14 में जहां विद्युत दुर्घटनाओं से मरने वाले व्यक्तियों की संख्या 570 हुआ करती थी, वहीं अब वह वर्ष 2015-16 में बढ़कर 723 हो गई है। मतलब 2 व्यक्ति रोज प्रदेश में विद्युत दुर्घटना से मर रहे हैं।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री से इस संवेदनशील प्रकरण पर हस्तक्षेप करने की मांग की है।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493