उप्र : फर्जी मुकदमा मामले में प्रजापति से जेल में पूछताछ होगी

आईपीएस अमिताभ को दो साल पहले मुलायम सिंह यादव ने जब फोन पर धमकी दी थी, और अमिताभ ने इस बात का खुलासा कर दिया था, उसके बाद इस दंपति के खिलाफ कथित फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए थे और अमिताभ ठाकुर को निलंबित कर दिया गया था।

उधर, नूतन की शिकायत पर 20 जून, 2015 को तत्कालीन कैबिनेट मंत्री प्रजापति, जरीना उस्मानी एवं अन्य के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ था, पर पुलिस ने आनन-फानन में 13 जुलाई, 2015 को इस मामले में अंतिम रिपोर्ट लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया था, जिस पर सीजेएम लखनऊ ने दिसंबर, 2015 में अंतिम रिपोर्ट को खारिज करते हुए अग्रिम विवेचना के आदेश दिए थे।

11 जुलाई, 2015 को अमिताभ के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था। अमिताभ और नूतन ने शुरू से ही कहते रहे कि प्रजापति के इशारे पर महिला आयोग की पूर्व अध्यक्षा जरीना उस्मानी ने उन्हें फंसाने के लिए गाजियाबाद की एक महिला को हथियार बनाया था और उसके माध्यम से दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाया था।

हाल ही में इस मामले के विवेचक सीओ गोमतीनगर ने झूठा पाते हुए मुकदमा दर्ज कराने वाली गाजियाबाद की महिला के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। अब इस मुकदमे के विवेचक गोमतीनगर के इंस्पेक्टर ने लखनऊ के सीजेएम से प्रजापति से जेल में जाकर बयान दर्ज कराने की अनुमति प्राप्त की है।

मुलायम ने आईपीएस अमिताभ को फोन पर धमकी दी थी, जब उन्होंने तत्कालीन खनन मंत्री प्रजापति के खिलाफ लोकायुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई थी। दुस्साहस दिखाने के कारण आईपीएस अमिताभ लगभग डेढ़ साल निलंबित रहे। आरएसएस समर्थक अमिताभ ठाकुर को अपनी सरकार के आने पर अब न्याय मिलने की आस है।

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