सपा का कहना है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कुशलता और लोकप्रियता का ही नतीजा है कि पिछले दिनों जितने उपचुनाव या पंचायती चुनाव हुए, उनमें समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी जीतते रहे हैं और अभी ताजा मामला तो राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों का है, जिसमें भाजपा की किरकिरी हुई। शाह को इसका भी ज्ञान होना चाहिए।
सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष का दावा है कि केंद्र सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के रास्ते पर चल रही है, जुमलेबाजी का यह एक दूसरा नमूना है। भाजपा के सहयोगी दल ही जब-तब अपना असंतोष जताते रहते हैं और सबके विकास का हाल तो यह है कि नीति आयोग बनने के बाद से उप्र को 9 हजार करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है।
प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष जब अखिलेश सरकार से पांच साल का हिसाब पूछते हैं तो उन्हें अपने दो साल का हिसाब भी पेश करना चाहिए। समाजवादी सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र के लगभग सभी वादे पूरे कर दिए हैं, जबकि केंद्र की भाजपा सरकार अपना एक भी वादा पूरा नहीं कर पाई है।
चौधरी ने कहा कि शाह को उत्तर प्रदेश के अपने 71 भाजपा सांसदों से भी पूछना चाहिए कि उन्होंने दो साल के भीतर प्रदेश के विकास में कितना साथ दिया है।
सपा प्रवक्ता ने कहा कि जहां तक कानून व्यवस्था का सवाल है, उत्तर प्रदेश की स्थिति अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित दिल्ली राज्य से अच्छी है। प्रदेश में यदि कहीं कानून व्यवस्था खतरे में है तो उसके पीछे भाजपा-आरएसएस का हाथ है।
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