प्रदेश के कृषि मंत्री विनोद कुमार उर्फ पण्डित सिंह ने सोमवार को कहा, “खरीफ की फसल में धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंगफली, उड़द, मूंग, तिल, अरहर, सोयाबीन, गन्ना तथा रबी की फसल में गेहूं, चना, मटर, मसूर, लाही, सरसांे तथा आलू की फसलों में यह योजना लागू होगी।”
उन्होंने कहा कि प्रतिकूल मौसम के कारण फसल की बुवाई न कर पाने/असफल बुवाई की स्थिति में क्षति का आंकलन ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाएगा। इसी प्रकार प्राकृतिक आपदाओं, रोगों, कृमियों व अन्य जोखिमों से फसल नष्ट होने की स्थिति में क्षति का आंकलन भी ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि फसल कटाई के उपरान्त 14 दिनों तक खेत में सुखाई हेतु रखी गई कटी फसल को चक्रवात व चक्रवाती वर्षा/बेमौसम वर्षा ओलावृष्टि, भू-स्खलन, व जल प्लावन से क्षति की स्थिति में फलस की क्षति का आंकलन व्यक्तिगत बीमित कृषक के स्तर पर किया जाएगा।
सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के संचालन हेतु क्रियान्वयन एजेन्सी के रूप में समस्त जनपदों में ऋणी एवं गैर ऋणी कृषकों की फसलों को बीमा कवरेज प्रदान करने हेतु नामित किया गया है।
उन्होंने कहा कि ऋणी एवं गैर ऋणी सभी कृषक खरीफ मौसम में 31 जुलाई, 2016 एवं रबी मौसमी में 31 दिसम्बर, 2016 की अन्तिम तिथि पर प्रीमियम की कटौती कराते हुए योजना में सम्मिलित हो सकते हैं।
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