मुंबई, 13 जून (आईएएनएस)। फिल्मकार हंसल मेहता सोमवार को फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को एक कट के साथ रिलीज करने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले पर बेहद उत्साहित थे। लेकिन, उन्होंने साथ ही कहा कि हर फिल्मकार उत्कृष्ट कानूनी सहायता प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिए सेंसर बोर्ड को अपने काम में तानाशाही रोकनी होगी।
मेहता सेंसर बोर्ड के खिलाफ लड़ाई में फिल्म के निर्माताओं के समर्थन में खड़े रहे थे। बंबई उच्च न्यायालय के फैसले के बाद उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मैं खुश हूं, उत्साहित हूं और मुझे राहत मिली है कि आखिरकार ‘उड़ता पंजाब’ को माननीय अदालत ने रिलीज के लिए स्वीकृति दे दी है।”
उन्होंने कहा, “यह सीबीएफसी (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड) द्वारा दिशा-निर्देशों की अनुचित व्याख्या से निवारण पाने के लिए हमारा संघर्ष बन गया था।”
मेहता ने कहा, “इस कहानी से एक सीख मिली है। हमारे काम को प्रमाणित करें, सेंसर न करें। हम रचनात्मक कलाकार हैं और आमतौर पर जिम्मेदारी से काम करते हैं। हम पर भरोसा रखिए।”
उन्होंने कहा, “‘उड़ता पंजाब’ मामले को सकारात्मक परिणाम में बदले सामूहिक आक्रोश की एकमात्र घटना न बनने दें। हम सभी को कमजोर के साथ खड़े रहना चाहिए। सीबीएफसी को असहाय निर्माताओं पर तानाशाही न करने दी जाए।”
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