याचिका में कहा गया है कि यश भारती पुरस्कारों में कई ऐसे नाम हैं, जिनसे उनके सामाजिक क्षेत्र में किये गए कार्य निश्चित रूप से श्रेष्ठतर हैं। इसमें कहा गया है कि स्थवी अस्थाना, इकबाल अहमद सिद्दीकी, वजीर अहमद खान, चक्रेश जैन सहित कई ऐसे नाम हैं, जिनकी सार्वजनिक उपलब्धियों के संबंध में पूरे इंटरनेट पर लगभग शून्यप्राय जानकारी है।
अमिताभ ने कहा कि जिस प्रकार पहले चुपके-चुपके 22 नाम घोषित किए गए और बाद में एक बार 12 और दुबारा 12 नाम नाम बढ़ाकर कुल 46 नाम कर दिए गए हैं, उससे साफ जाहिर हो जाता है कि ये पुरस्कार मनमाने तरीके से दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के मुख्य सचिव आलोक रंजन की पत्नी सुरभि रंजन को यह पुरस्कार दिया जाना सीधे-सीधे स्वाभाविक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है और इन पुरस्कारों की विश्वसनीयता को समाप्त कर देता है। इसी प्रकार तमाम ऐसे नाम हैं जो स्पष्टतया इस योग्य नहीं हैं कि उन्हें ये पुरस्कार दिए जाएं।
याचिका के अनुसार, इस प्रकार बिना किसी सम्यक प्रक्रिया के 11 लाख रुपये का पुरस्कार और 50,000 रुपये प्रति माह का पेंशन दिया जाना स्थापित प्रशासनिक सिद्धांतों के विरुद्ध है और मनमानेपन की निशानी है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर धमकाने का आरोप लगा चुके आईपीएस अफसर ने इस पुरस्कार को रद्द करते हुए नियमानुसार पुरस्कार अर्पण करने की प्रार्थना की है।
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