लखनऊ, 19 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) भी 27 जिलों में अपने उम्मीदवार उतारेगी।
पीपीपी उप्र के अलावा असम में होने वाले विधानसभा चुनाव भी लड़ेगी।
ज्ञात हो कि इस पार्टी को अभी तीन दिन पहले ही चुनाव आयोग ने मान्यता प्रदान की है।
पीपीपी के अध्यक्ष अनूप पांडेय ने शुक्रवार को लखनऊ प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में ये बातें कही। उन्होंने कहा कि पीपीपी का गठन पूर्वांचल के विकास और अलग पूर्वांचल राज्य के लिए किया गया है। इसका उद्देश्य है कि पूर्वांचल के 27 जिलों को मिलाकर एक अलग राज्य का गठन किया जाए।
पांडेय ने सभी राजनीतिक दलों पर पूर्वांचल के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल इस बात का जवाब दें कि जिस तरह का विकास गाजियाबाद और नोएडा में हो रहा है, उसी तरह का विकास गाजीपुर और बलियां जैसे जिलों में क्यों नही हो रहा।
पांडेय ने सवाल उठाया कि पूर्वांचल के लोग देश के विकास में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन विकास के पैमाने पर पूर्वांचल अति पिछड़ा क्यों है।
उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में पिछड़ेपन की वजह से ही यहां के लोगों को काम के लिए मुंबई और दिल्ली पलायन करना पड़ रहा है, और वहां भी उन्हें तिरस्कार ही मिलता है। पूर्वांचल राज्य बनने के बाद उप्र के ये पिछड़े जिले भी विकास के पथ पर दौड़ने लगेंगे।
पांडेय ने कहा कि वर्ष 2017 में होने वाले चुनाव में पार्टी पूरे दम-खम के साथ मैदान में उतरेगी। पार्टी केवल तीन दिन पुरानी है। इसके पदाधिकारियों के चयन का काम पूरा कर लिया गया है। जल्द ही एक अहम बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
पीपीपी अध्यक्ष ने यह भी कहा कि जिन राज्यों में पूरबिया लोग हैं, पार्टी वहां चुनाव लड़ेगी। पीपीपी दिल्ली, महाराष्ट्र के साथ ही पूवरेत्तर राज्यों में भी हर चुनाव में हिस्सा लेगी।
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