राज्यपाल ने कहा, “प्रदेश के मुखिया के नाते मैं स्व. जनेश्वर मिश्र की 84वीं जयंती पर अपनी तथा प्रदेश की जनता की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”
लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि जनेश्वर मिश्र से उनके बहुत अच्छे संबंध थे। उम्र में मिश्र उनसे सात माह बड़े थे, उसी तरह कार्य और अनुभव में भी बड़े थे। वे तीन बार लोकसभा और तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे। उनका धारा प्रवाह वक्तव्य बहुत प्रभावी होता था। उस समय लोकसभा में बड़ी शालीन बहस होती थी।
उन्होंने कहा कि मिश्र का अपने विचार रखने का तरीका अप्रतिम था।
नाईक ने कहा, “यह संयोग है कि हम दोनों में कुछ समानताएं हैं। कभी वे सत्ता पक्ष में रहे तो मैं विपक्ष में और जब जनेश्वर मिश्र विपक्ष में तो मैं सत्ता पक्ष में रहा। मगर दोनों के संबंध बहुत नजदीक के थे। यह सुखद संयोग भी रहा कि हम दोनों ने अपने-अपने समय में रेलवे एवं पेट्रोलियम मंत्रालय का काम देखा। मिश्र ने कई प्रधानमंत्रियों की कैबिनेट में काम किया।”
राज्यपाल ने अपने संसद के दिनों को याद करते हुए बताया कि सेंट्रल हॉल में भेंट के दौरान उत्तर के लोग और स्वयं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मुलायम सिंह को ‘नेताजी’ कहते थे। जनेश्वर मिश्र को ‘छोटे लोहिया’ कहकर संबोधित किया जाता था। उन्होंने कहा कि जनेश्वर मिश्र का कद वास्तव में बहुत ऊंचा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव, बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन, राजनैतिक पेंशन मंत्री राजेंद्र चौधरी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री नारद राय उपस्थित थे।
उधर, नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) स्थित सपा कार्यालय में भी समाजवादी पुरोधा जनेश्वर मिश्र की 84वीं जयंती मनाई गई।
महानगर अध्यक्ष राकेश यादव एवं महासचिव राघवेंद्र दुबे ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जनेश्वर मिश्र के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। इस अवसर पर विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने उनके व्यक्तिगत एवं राजनैतिक जीवन पर प्रकाश डाला।
राकेश यादव ने कहा कि जनेश्वर मिश्र का जन्म 5 अगस्त, 1933 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के शुभ नताही गांव में हुआ था। जनेश्वर जी डॉक्टर राम मनोहर लोहिया एवं राजनारायण से बेहद प्रभावित थे। वे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रहे। वे के.डी मालवीय एवं वी.पी.सिंह जैसे दिग्गजों को हराकर लोकसभा पहुंचे थे। उन्होंने हमेशा गरीबों के लिए संघर्ष किया।
राघवेंद्र दुबे ने कहा कि जनेश्वर जी ने सादगी पसंद जीवन जिया। उनका कहना था कि अमीरी और गरीबी की खाई को पाटकर ही सच्चे समाजवाद की स्थापना की जा सकती है। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही समाजवाद की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।
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