नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को हुई राष्ट्रीय पात्रता सह-प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) में शामिल कई परिक्षार्थियों ने निरीक्षकों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है, यहां तक कि कुछ महिला परिक्षार्थियों से शर्ट उतारने के लिए भी कहा गया।
कुछ परिक्षार्थियों ने धार्मिक भेदभाव की शिकायत भी की है और कहा कि उनसे जनेऊ उतारने के लिए कहा गया जबकि नमाजी टोपी पहनने की इजाजत दी गई।
जनकपुरी के परीक्षा केंद्र में परीक्षा देने वाले एक विद्यार्थी ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, “उन लोगों ने हमारी दो-दो बार तलाशी ली। मुझसे कहा गया कि या तो शर्ट उतार कर तलाशी दो या परीक्षा छोड़कर बाहर चले जाओ। मुझे बताया गया कि यह सब नकल को रोकने के लिए किया जा रहा है।”
विद्यार्थी ने जब पूछा कि वह अपनी शर्ट उतारकर कहां रखे तो उससे कहा गया कि ‘यह तुम्हारी समस्या है।’
उसने कहा, “मुझे शर्मिदगी उठानी पड़ी और परीक्षा शुरू होने से पहले मेरा सारा ध्यान भंग हो गया। ऐसा लग रहा था जैसे मैंने कोई अपराध किया हो या अन्य परिक्षार्थियों से गया गुजरा होऊं।”
करियप्पा मार्ग स्थित परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने आई सफेद दाग से पीड़ित एक महिला परिक्षार्थी से अपनी शर्ट की बाहें जितना ऊपर हो सके मोड़ने के लिए कहा गया।
महिला परिक्षार्थी ने बताया, “उन्होंने मुझसे पूछा कि मैंने पूरी बांह की शर्ट क्यों पहनी है। मैंने बताया कि ऐसा मैंने अपनी बीमारी को छिपाने के लिए किया है। उन्होंने मुझसे शर्ट की बांह जितना हो सके ऊपर मोड़ने के लिए कहा। मेरे लिए यह सब बहुत असहज करने वाला था और उन लोगों ने बेहद असंवेदनशीलता दिखाई।”
कुछ अन्य महिला परिक्षार्थियों ने बताया कि उनसे कान में पहनी सोने की बालियां उतारने के लिए कहा गया। जब उन्होंने पूछा कि वे बालियां उतारकर कहां रखें तो उन्होंने कहा कि यह आपकी समस्या है।
सीबीएसई के उप-सचिव संयम भारद्वाज ने आईएएनएस से कहा, “इसमें परिक्षार्थियों और उनके परिजनों की गलती है। मैं कहना चाहूंगा कि वे सभी अनुचित कर रहे थे। अगर कल को कोई परिक्षार्थी परीक्षा केंद्र में कोई संचार उपकरण लेकर चला आए, तब आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी? इसीलिए सीबीएसई निष्पक्ष तरीके से परीक्षा का आयोजन नहीं करवा पाती।”
जनेऊ उतरवाने के सवाल पर भारद्वाज ने कहा, “हमने इस तरह का कोई निर्देश नहीं दिया था, लेकिन हमने हर परिक्षार्थी की विधिवत जांच के आदेश दिए थे। पारंपरिक वस्त्रों में परीक्षा देने आने वालों को समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने के लिए कहा गया था, ताकि हम उनकी अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर सकें।”
गौरतलब है कि मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पहली बार देश में एनईईटी की व्यवस्था की गई है।
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