मुंबई, 28 मई (आईएएनएस)। एलजीबीटीक्यू समुदाय पर बनी भारत की पहली फिल्म ‘सिसक’ का हिस्सा अभिनेता जितिन गुलाटी ने कहा है कि ज्यादातर लोग समुदाय के विभिन्न वर्गो के बीच के अंतर को नहीं समझते हैं और इससे मुख्यधारा की फिल्मों का विषय प्रभावित होता है।
फिल्म के बारे में जितिन ने आईएएनएस से कहा, “मुझे लगता है कि एलजीबीटीक्यू समुदाय के बारे में हमारे समाज की सोच विकृत है। लोगों को संप्रदाय और समुदाय के बीच का अंतर पता नहीं है। उदाहरण के तौर पर, मुझे संदेह है कि किसी को भी ट्रांसजेंडर और एक समलैंगिक के बीच का अंतर पता है। यही सिनेमा में भी आता है।”
उन्होंने कहा, “जब तक हम अपने समुदाय के बारे में लोगों के बीच जागरूकता नहीं पैदा करते हैं, तबतक हम ऐसी फिल्में नहीं बना सकते जो समुदाय के किसी किरदार को सही रूप में प्रस्तुत करती हो। यह सब जानकारी के अभाव के कारण होता है।”
हालांकि, अभिनेता को उम्मीद है कि समय काफी प्रगतिशील हैं, जहां कम से कम कुछ लोग खुलकर बाहर आए हैं और लोगों के बीच बातचीत शुरू हुई।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि आने वाले 10 वर्षों में, हमें परिवर्तन देखने को मिलेंगे।”
‘सिसक’ दो लड़कों की कहानी है, जो लोकल ट्रेन में मिलते हैं और बिना कुछ बोले एक-दूसरे से आकर्षित हो जाते हैं और एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं।
फराज आरिफ अंसारी द्वारा निर्देशित और लिखित ‘सिसक’ में ध्रुव सिंघल भी प्रमुख भूमिका में हैं।
यह फिल्म रविवार को कशिश मुंबई इंटरनेशनल क्वियर फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित हो रही है।
dharmpath.com dharmpath