ओंटारियो की प्रधानमंत्री ने स्वर्ण मंदिर में प्रार्थना की

अमृतसर, 31 जनवरी (आईएएनएस)। कनाडा के ओंटारियो प्रांत की प्रधानमंत्री कैथलीन वायने ने रविवार को सिखों के सर्वाधिक पवित्र धर्मस्थल हरमिंदर साहिब में प्रार्थना की। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा उनका सम्मान किया गया। कैथलीन समलैंगिक अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाने के लिए जानी जाती हैं।

कैथलीन ने फिरोजी रंग का सूट पहन रखा था और सिर को दुपट्टे से ढंका हुआ था। स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने के लिए दाखिल होने के समय उनके साथ एसजीपीसी के पदाधिकारी भी थे।

कैथलीन खुद समलैंगिक हैं। समलैंगिक विवाह की पक्षधर हैं। समलैंगिकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाती रहती हैं।

स्वर्ण मंदिर में उनके आने से पहले उनकी यात्रा को लेकर विवाद पैदा हुआ। एसजीपीसी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा था कि कनाडा की नेता का प्रार्थना के लिए आने के लिए स्वागत है। लेकिन, समलैंगिक विवाह पर उनके विचार की वजह से उनका सम्मान सिरोपा देकर नहीं किया जा सकता।

एसजीपीसी का कहना है कि सिख धर्म समलैंगिक विवाह को वैध नहीं मानता।

लेकिन, एक बड़े विवाद को बचा लिया गया। एसजीपीसी के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। उन्हें एसजीपीसी के सूचना दफ्तर में ले जाया गया और उन्हें स्वर्ण मंदिर की सोना चढ़ाई हुई तस्वीर भेंट में दी गई।

एसजीपीसी अधिकारी और स्वयंसेवक वायने को धर्मस्थल के बाहर से ही अपने सुरक्षा घेरे में लिए हुए थे और उन्हें अपने साथ मंदिर के परमपावन स्थान तक ले गए। उन्हें धर्मस्थल के सभी खास स्थान दिखाए गए।

वायने ने आगंतुक पुस्तिका में लिखा कि वह इस खूबसूरत पवित्र स्थल में आकर खुद को सौभाग्यशाली महसूस कर रही हैं।

वह लंगर हाल तक भी गईं और थोड़ी देर के लिए खाना पकाने में हाथ भी बंटाया।

वायने 10 दिन की यात्रा पर भारत आई हुई हैं।

कनाडा और इसके ओंटारियो प्रांत का पंजाबी समुदाय से गहरा रिश्ता है। कनाडा में कई सांसद इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सज्जन का जन्म पंजाब के होशियारपुर में हुआ था। इसी संबंध की वजह से कनाडा के नेता पंजाब आते रहते हैं और यहां आने पर गुरुद्वारों में प्रार्थना करने जाना नहीं भूलते।

कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर नवंबर 2009 में स्वर्ण मंदिर में आए थे। वह खालसा पंथ की जन्मस्थली तख्त केशगढ़ साहिब भी गए थे। इस तख्त को स्वर्ण मंदिर के बाद दूसरा सर्वाधिक पवित्र सिख धर्मस्थल माना जाता है।

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