नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस ने बुधवार को यहां अदालत को बताया कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र उमर खालिद और अनिर्बन भट्टाचार्य ने 9 फरवरी के कार्यक्रम का आयोजन किया था। छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की इस कार्यक्रम के आयोजन में कोई भूमिका नहीं थी।
पुलिस ने यह बातें खालिद और अनिर्बन की जमानत याचिका के विरोध के दौरान कही, जिन पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रितेश सिंह की अदालत में राजद्रोह का मामला चल रहा है।
पुलिस ने अदालत से कहा कि इन दोनों का मामला जेएनयू छात्र कन्हैया कुमार के मामले से अलग है।
अदालत ने जमानत की याचिका पर अपने आदेश को सुरक्षित रखा है और इसे 18 मार्च को जारी किया जाएगा।
दोनों आरोपी छात्रों ने समानता के आधार पर अपने लिए जमानत की मांग करते हुए कहा कि कन्हैया कुमार को इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय से 2 मार्च को छह महीने की अंतरिम जमानत मिल चुकी है।
विश्वविद्यालय परिसर में हुए कार्यक्रम में कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी नारेबाजी की गई थी। इस मामले में दोनों छात्रों ने पिछले महीने परिसर के मुख्य द्वार पर पुलिस के समक्ष आत्मसर्मपण किया था।
खालिद और भट्टाचार्य के खिलाफ वसंत कुंज पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले कन्हैया कुमार को भी इसी मामले में 12 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस ने अदालत को बताया कि कार्यक्रम का विवादास्पद पोस्टर अनिर्बन ने डिजायन किया था और उसे अंतिम मंजूरी खालिद ने दी थी। यह पोस्टर अनिर्बन ने खालिद को ईमेल से भेजा था।
दिल्ली पुलिस ने अदालत से कहा कि विवादास्पद पोस्टर पर आयोजनकर्ताओं के रूप में खालिद और अनिर्बन का नाम दर्ज था। दोनों छात्रों ने अन्य छात्रों के साथ इस कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय से 8 फरवरी को अनुमति मांगी थी।
पहले उन्हें अनुमति दे दी गई, लेकिन कार्यक्रम के पोस्टर जारी होने के बाद अनुमति रद्द कर दी गई।
वहीं, दोनों के बचाव पक्ष के वकील ने अदालत से निजी न्यूज चैनलों पर दिखाए गए क्लिप की प्रमाणिकता पर सवाल उठाया। दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि निजी चैनलों से प्राप्त क्लिप के अलावा जेएनयू कर्मी जसप्रीत सिंह से हासिल किए गए क्लिप को भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
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