नई दिल्ली, 15 मार्च (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर एक और देशद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए दायर याचिका खारिज कर दी।
याचिका में कन्हैया पर कार्रवाई की मांग करते हुए उस पर आरोप लगाया गया था कि उसने कश्मीरी महिला से दुष्कर्म के लिए भारतीय सेना को जिम्मेवार ठहराया था।
याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने कहा कि कन्हैया पर पहले से देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है इसलिए वह दूसरी याचिका को स्वीकार नहीं करेंगी।
अदालत ने कहा, “हमारी कानून व्यवस्था प्रणाली अपना ख्याल स्वयं रख सकती है। आपके जैसे सामाजिक कार्यकर्ता उसे नहीं चाहिए। जांच चल रही है। मैं इस पर विचार नहीं करूंगी।”
अदालत ने याचिकाकर्ता देवदत्त शर्मा की अधिस्थिति के बारे में भी पूछा। इस पर शर्मा के वकील सुग्रीव दूबे ने कहा कि उनके मुवक्किल ने भारत के एक नागरिक की हैसियत से यह याचिका दायर की है।
दूबे ने पहले अदालत से इस मामले की जांच निगरानी ब्यूरो (आईबी)से कराने के आदेश देने की मांग थी।
वकील ने कहा, “भारतीय सेना देश का अभिन्न अंग है और उस पर यह आरोप नहीं लगाया जा सकता है कि वह कश्मीरी महिला से कश्मीर में दुष्कर्म करती है। यह गंभीर मामला है और ऐसा कहने के लिए कन्हैया कुमार पर देशद्रोह कानून के तहत मामला बनता है।”
दूबे ने कहा कि कन्हैया ने अदालत में हलनफनामा दिया था कि वह किसी भी तरह की राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं होगा। बावजूद इसके जेल से रिहा होने के बाद उसने 45 मिनटों तक शायद पूर्णत: राजनीतिक भाषण दिया और अपने ऊपर देशद्रोह कानून के प्रावधानों के तहत मुकदमा को आमंत्रित किया।
उल्लेखनीय है कि 2 मार्च को दिल्ली उचच न्यायालय ने देशद्रोह के मामले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को छह माह के लिए अंतरिम जमानत दी थी। उसे विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रविरोधी नारे लगाने के लिए 9 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था।
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