किसान के बेटे भगवानदास ने बताया कि उसका पिता फसल बर्बाद होने से काफी चिंतित रहता था। उसने इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से ग्रीन कार्ड बनवाकर चार लाख रुपये कर्ज लिया था, जो चुकता नहीं कर पाया।
एक वर्ष पूर्व उसकी पौत्रवधू ने गृह कलह के कारण शरीर में आग लगा ली थी। उसके उपचार के लिए किसान ने साहूकारों से तीन लाख रुपये से अधिक का कर्ज लिया, लेकिन खराब फसल और जीवकोपार्जन का कोई दूसरा साधन न होने के कारण कोई कर्ज नहीं चुका पाया।
भगवानदास ने बताया कि कर्ज चुकाने के लिए एक सप्ताह पूर्व उसके पिता ने अपनी तीन बीघा जमीन भी बेच दी, लेकिन उससे कुल सवा लाख रुपये ही प्राप्त हुए जो कर्ज चुकता करने के लिए नाकाफी थे।
किसान छोटेलाल परिवार के ही सुरेश के आम के पेड़ बटाई पर लेकर वहीं खेत में रुककर उनकी रखवाली करता था।
भगवानदास ने बताया कि रात में छोटेलाल ने अपने गले में रस्सी का फंदा डालकर वहीं खेत में आम के पेड़ से फांसी लगा ली। सुबह जब ग्रामीण शौच क्रिया के लिए खेतों की ओर गए तो पेड़ से झूलते किसान के शव को देखकर हड़कंप मच गया।
परिजनों की सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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