श्रीनगर, 24 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू एवं कश्मीर में शांति की शनिवार को अपील की और कहा कि घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सरकार किसी भी व्यक्ति से बात कर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में अशांति पैदा करने के लिए पाकिस्तान को लताड़ भी लगाई।
राजनाथ ने अशांत कश्मीर के अपने दो दिवसीय दौरे के समापन पर मीडिया से कहा, “मैं लोगों से अपील करता हूं कि कश्मीर घाटी में शांति और सामान्य स्थिति बहाल होने दें।”
उन्होंने कहा कि नई दिल्ली एक रचनात्मक संवाद के लिए तैयार है, जिससे घाटी में सामान्य स्थिति बहाल हो सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घाटी के हालात से बहुत चिंतित हैं, जहां आठ जुलाई को आतंकवादी कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद सड़कों पर भड़के विरोध प्रदर्शनों में अबतक 45 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
राजनाथ ने कहा, “मैं जम्मू एवं कश्मीर के लोगों से अपील करता हूं कि शांति एवं सामान्य स्थिति की बहाली में रचनात्मक सुझावों के जरिए वे सरकार की मदद करें।”
उन्होंने कहा कि यदि वैचारिक मतभेद हैं, तो उन्हें संवाद के जरिए सुलझाया जा सकता है।
राजनाथ ने कहा, “सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए और शांति बहाली के लिए हम किसी से भी बातचीत कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा, “हम मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को राय में लेकर राज्य में शांति व सामान्य स्थिति बहाली में इच्छुक किसी भी व्यक्ति से बात करेंगे।”
गृहमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार आतंकवाद को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस्लामाबाद की लाल मस्जिद में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चलाता है, दूसरी ओर कश्मीर में युवाओं को हथियार उठाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
उन्होंने कहा, “इसे रोका जाना चाहिए। पाकिस्तान की भूमिका ठीक नहीं है। उन्हें जम्मू एवं कश्मीर के बारे में अपनी आदत और सोच बदलनी चाहिए।”
गृहमंत्री ने यह भी कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में किसी तीसरी ताकत को शामिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
राजनाथ ने अशांति के दौरान मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति शोक संवेदनना भी व्यक्त की।
उन्होंने कश्मीरी युवकों से आग्रह किया कि सुरक्षा बलों पर पथराव न करें और साथ ही सुरक्षा बलों से भी आग्रह किया कि उन्हें प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी से बचना चाहिए।
उन्होंने संसद में किए अपने वादे को दोहराया कि केंद्र सरकार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गैर घातक हथियारों के इस्तेमाल के तरीके खोजने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित करेगी। यह समिति दो महीने में अपनी रपट सौंपेगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री से कहा है कि जरूरत पड़ने पर घायल कश्मीरियों को इलाज के लिए दिल्ली भेजा जा सकता है।
उन्होंने कहा, “सरकार एम्स में उनका इलाज कराएगी।”
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