श्रीनगर, 15 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर में यहां सोमवार को सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए। इस दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का एक वरिष्ठ अधिकारी भी शहीद हो गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
चार आतंकवादियों के एक समूह के हमले में सीआरपीएफ की 49वीं बटालियन के कमांडेंट प्रमोद कुमार शहीद हो गए, जबकि नौ सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “सुरक्षाबलों पर हमले के बाद आतंकवादी नौहट्टा में एक घर में घुस गए, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई।”
उन्होंने कहा, “दो आतंकवादियों को मार गिराया गया है, जबकि दो आतंकवादी घर के भीतर से अभी भी गोलीबारी कर रहे हैं।”
बीते आठ जुलाई को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भड़के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के मद्देनजर, लगभग पांच सप्ताह से श्रीनगर के अधिकांश हिस्सों में कर्फ्यू लगा है।
स्वतंत्रता दिवस के विरोध में अलगाववादियों के बंद के मद्देनजर सोमवार को सुरक्षा और पुख्ता कर दी गई थी।
मुख्य आधिकारिक कार्यक्रम पुख्ता सुरक्षा के बीच श्रीनगर के लाल चौक के नजदीक बख्शी स्टेडियम में हुआ। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रध्वज फहराया और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।
घाटी में हालिया हिंसा की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के तीनों क्षेत्रों लद्दाख, जम्मू व कश्मीर के समान विकास के लिए शांति जरूरी है।
उन्होंने कहा, “मैं सुनिश्चित किया कि आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान नागरिकों का इस्तेमाल मानव ढाल के तौर पर न किया जाए। मैं उदास हूं, क्योंकि कुछ अलगाववादी तत्व अपने कुत्सित हितों की पूर्ति के लिए आपके युवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “सन् 1990 से लेकर अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं, लेकिन हमने क्या पाया? बीते 40 दिनों में हमने अपने युवाओं को उनके हवाले कर दिया, जिन्होंने अपने हितों के लिए उन्हें ढाल बनाया।”
उन्होंने कहा कि कश्मीरियों के घावों पर मरहम लगाने के लिए उनकी सरकार को समय की दरकार है।
मुख्यमंत्री ने भारत व पाकिस्तान दोनों देशों से साथ आने और विभाजित कश्मीर के दोनों हिस्सों में शांति के लिए काम करने की अपील की।
उन्होंने कहा, “झेलम नदी में इतना रक्त पहले से ही बह चुका है कि उसमें और रक्त के लिए जगह नहीं बची है।”
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