नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। वयोवृद्ध कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी अपने पुत्र रोहित शेखर के साथ उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों से एक माह पहले बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के निवास पर पिता-पुत्र भाजपा में शामिल हुए।
तिवारी (91) इकलौते राजनीतिक नेता हैं जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वह केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रमुख मंत्रालयों जैसे विदेश, वित्त, उद्योग और संसदीय कार्य मंत्रालय के प्रभार संभाल चुके हैं।
एकीकृत उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहने के अलावा साल 2000 में पृथक उत्तराखंड राज्य बनने पर तिवारी इसके पहले मुख्यमंत्री बनें।
साल 2007 से 2009 तक वह आंध्र प्रदेश के राज्यपाल थे जब एक ‘सेक्स स्कैंडल’ के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।
उनके उपर मुकदमा चलाने के लिए शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, लेकिन तिवारी ने एक राजनीतिक साजिश बताकर आरोपों को खारिज कर दिया था।
एक साल पहले तिवारी एक और विवाद में फंस गए थे, जब रोहित शेखर ने उन्हें अपना जैविक पिता बताते हुए उनके खिलाफ पितृत्व का वाद दायर किया था।
कानूनी घमासान के बीच अदालत ने डीएनए परीक्षण का आदेश दिया। जांच के परिणाम ने साबित किया कि एन डी तिवारी रोहित के जैविक पिता और उज्जवला शर्मा रोहित की माता हैं।
साल 2014 में तिवारी ने उज्जवला शर्मा से औपचारिक रूप से विवाह कर लिया।
एकीकृत उत्तर प्रदेश के नैनीताल जिले के एक गांव में साल 1925 में जन्मे तिवारी ने छात्र राजनीति में अपनी छाप छोड़ी थी।
प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर वह साल 1952 में नैनीताल विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। वह साल 1963 में कांग्रेस में शामिल हुए थे।
वह लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं और योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में भी सेवा दे चुके हैं।
जब पी.वी. नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे तब तिवारी और अर्जुन सिंह कांग्रेस से अलग हो गए और एक प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस का गठन किया। बाद में सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस में इस दल का विलय हो गया था।
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