‘कालाकांडी’ में वैसी ही भाषा, जैसी बोलते हैं वहां के लोग : अक्षत वर्मा

मुंबई, 10 दिसंबर (आईएएनएस)। फिल्म ‘डेल्ही बेली’ के उम्दा लेखक अक्षत वर्मा एक बार फिर दर्शकों के लिए बेहतरीन फिल्म लेकर आए हैं। बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म ‘कालाकांडी’ ने कई लोगों को हैरानी में डाल दिया है और भाषा को लेकर शर्मिदगी भी महसूस कराई है।

मुंबई, 10 दिसंबर (आईएएनएस)। फिल्म ‘डेल्ही बेली’ के उम्दा लेखक अक्षत वर्मा एक बार फिर दर्शकों के लिए बेहतरीन फिल्म लेकर आए हैं। बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म ‘कालाकांडी’ ने कई लोगों को हैरानी में डाल दिया है और भाषा को लेकर शर्मिदगी भी महसूस कराई है।

सीबीएफसी के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने कहा था, “जो गालियां आप इस फिल्म में सुनेंगे, अपनी जिंदगी में आपने कभी नहीं सुनी होगी।”

अक्षत शुक्रगुजार हैं कि फिल्म सेंसर बोर्ड के कांट-छांट से बच गई।

अक्षत ने कहा, “सीबीएफसी ने फिल्म में 70 से ज्यादा कट लगाने के लिए कहा था और यह ज्यादातर उस भाषा को लेकर था, जिसके बारे में पहलाज जी ने आपको बताया था, लेकिन जिस तरह के परिवेश में मैं गया, वहां लोग ऐसे ही बात करते हैं। आप किरदारों का गला सिर्फ इसलिए नहीं घोंट सकते, क्योंकि उनके बोलने की शैली आपके अनुकूल नहीं है।”

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने ‘डेल्ही बेली’ की अलग तरह की भाषा-शैली को अपने निर्देशन में बनी फिल्म में भी लाने की कोशिश की है, तो उन्होंने हंसते हुए कहा, “ऐसा नहीं है कि मैंने जानबूझकर ऐसी फिल्म बनाई, जिसमें गालियां हो और ‘डेल्ही बेली’ की भाषा शैली जैसी हो। जब मैंने ‘डेल्ही बेली’ लिखी थी तो किरदारों ने मुझसे और दर्शकों से भी एक तरह से अलग अंदाज में बात की। अब ‘कालाकांडी’ में वे इस तरह की भाषा बोलते हैं, जिसे आम तौर पर हम स्वीकार नहीं कर सकते, लेकिन उस परिवेश और फिल्म के संदर्भ में बिल्कुल आम बात है।”

सौभाग्य से अक्षत के लिए जहां एक ओर सीबीएफसी ने भाषा को लेकर जो कांट-छांट करने की सिफारिश की थी, वहीं, दूसरी ओर केंद्रीय फिल्म अपीलीय न्यायाधिकरण ने इसे हरी झंडी दिखा दी।

निर्देशक ने कहा कि उन लोगों ने सभी कट को बहाल कर दिया और ऐसा करके उन लोगों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मेरे विश्वास को बहाल किया है। न्यायाधिकरण ने फिल्म के सार को समझा है।

‘कालाकांडी’ एक डार्क कॉमेडी फिल्म है। यह एक ऐसे शख्स के बारे में है, जिसे पता चलता है कि वह कुछ दिनों का मेहमान है।

अक्षत ने कहा, “हमारी फिल्मों में मौत के बारे में हंसना आसान बात नहीं है। क्या इस तरह का किरदार किसी न किसी सुखद याद से परेशान होगा? इस तरह की स्थितियां आपको वास्तविकता का अहसास कराएंगी।”

फिल्म में सैफ अली खान को लिए जाने के बारे में अक्षत ने कहा कि उन्हें फिल्म में अभिनेता को लेने पर खुशी है। अभिनेता ने किरदार की असमंजसता को प्रभावी ढंग से निभाया है।

सैफ मन के संदेहों, आंतरिक भावनाओं को जाहिर करने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाए हैं।

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