पटना, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। जनतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष अनिल कुमार ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पर लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग की है।
उन्होंने बिहार में गिरती कानून-व्यवस्था पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर नौ अप्रैल को सभी जिला मुख्यालयों में धरना कार्यक्रम की घोषणा की।
कुमार ने पटना में मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जब एक केंद्रीय मंत्री प्रशासनिक अधिकारी द्वारा दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) को रद्दी कागज का टुकड़ा बताकर फाड़ देने की बात कर रहा हो, तो देश के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है।
उन्होंने भागलपुर में दंगा फैलाने के मामले गिरफ्तार अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत को जमानत न मिलने का स्वागत किया, लेकिन इस मामले की जांच पर सवाल उठाया और कहा कि चौबे के मंत्री पद पर रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
अनिल कुमार ने भागलपुर के नाथनगर में भड़की सांप्रदायिक हिंसा को आरएसएस और बजरंग दल की सोची-समझी साजिश बताते हुए कहा कि नीतीश कुमार इस मामले में चुप क्यों हैं?
उन्होंने मुख्यमंत्री से सवालिया लहजे में पूछा, “नीतीश जी, बिहार को सांप्रदायिकता की आग में लगातार जलाने की कोशिश करने वाले अश्विनी चौबे और गिरिराज सिंह जैसे लोगों पर आपका क्या स्टेंड है?”
जनतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष ने कहा कि नीतीश ने अपनी छवि धर्मनिरपेक्ष नेता की बनाकर रखी है, फिर सांप्रदायिक हिंसा फैलाने वालों पर कार्रवाई में देरी क्यों होती है? उन्होंने नीतीश से पूछा, “आप कहते हैं कानून का राज है, तो फिर एक केंद्रीय मंत्री एफआईआर की कॉपी को रद्दी कागज का टुकड़ा बताकर फाड़ देता है और आप मौन रहते हैं।”
एससी-एसटी एक्ट में बदलाव और उससे पनपे आक्रोश पर उन्होंने कहा कि अगर देश के दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और कमजोरों पर हमला होगा, तो अंजाम बुरा होगा। उन्होंने कहा कि आखिर क्या वजह है कि केंद्र में भाजपा की सरकार आते ही देशभर में दलितों और अल्पसंख्यकों पर हम हमले तेज हो गए? जब यही सब करना है तो ‘सबका साथ सबका विकास’ कहकर देश को भरमाना कहां तक उचित है।
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