चेन्नई, 8 जनवरी (आईएएनएस)। तमिलनाडु में उस वक्त खुशी की लहर दौड़ गई, जब केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पोंगल पर्व के दौरान राज्य में परंपरागत जल्लीकट्ट (सांड़ पर काबू पाने के खेल) की अनुमति दे दी।
मदुरै और त्रिची जैसी जगहों में लोग सबसे ज्यादा खुश दिखे, क्योंकि इन जगहों पर जल्लीकट्ट का आयोजन होता है।
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया।
मोदी को भेजे अपने संदेश में जयललिता ने कहा, “मैं आपकी त्वरित कार्रवाई के लिए बहुत आभारी हूं। इससे जल्लीकट्ट के होने का रास्ता साफ हो गया है। यह एक ऐसा खेल है, जो तमिलनाडु के परंपरागत सांस्कृतिक मूल्यों को बरकरार रखता है, जिसका काफी ऐतिहासिक महत्व है और जो देसी पशुओं की परंपरागत नस्लों को बचाने वाला भी है।”
सर्वोच्च न्यायालय ने पशुओं के प्रति क्रूरता की वजह से इस खेल पर रोक लगा दी थी। तमिलनाडु सरकार ने इसके खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की हुई है। तभी से विभिन्न संगठन और राजनैतिक दल केंद्र पर इसकी अनुमति देने के लिए काफी दबाव बनाए हुए थे और ये काम कर गया।
केंद्र सरकार ने गजट अधिसूचना के द्वारा सांड़ों को उन पशुओं की सूची से निकाल दिया, जिनके सार्वजनिक प्रदर्शन की मनाही है।
केंद्र सरकार ने जल्लीकट्ट में सांड़ों को करतब दिखाने वाले जानवरों के रूप में इस्तेमाल की अनुमति दे दी। साथ ही महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, केरल और गुजरात में बैलगाड़ी दौड़ को भी अनुमति मिल गई।
लेकिन, बैलगाड़ी दौड़ के आयोजन के लिए पहले मंडलायुक्त या जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए कई नियमों का पालन करना होगा।
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