नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। केरल में आनेवाले विधानसभा चुनाव के लिए ज्यादातर राजनीतिक दलों के लिए उम्मीदवारों का चयन कठिन चुनौती बन गई है। एक उम्मीदवार ने कहा है कि वह अब चुनाव नहीं लड़ेंगे।
कांग्रेसनीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के दलों के लिए उम्मीदवारों का चयन काफी मुश्किल हो गया है, क्योंकि असंतुष्टों के बागी होने का खतरा है।
वामपंथी पार्टियों ने पिछले कुछ समय से यह नियम बनाया था कि दो बार विधायक रह चुके लोगों को टिकट नहीं दिया जाएगा। माकपा इस नियम को लेकर बहुत सख्त नहीं रही है, लेकिन भाकपा इसका कड़ाई से पालन करती है।
कांग्रेस में किसी तरह का नियम न होने से उनके लिए उम्मीदवार चुनना काफी कठिन कार्य बन गया है। पिछले कई बार से कांग्रेस सबसे पहले उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया में जुट जाती है, लेकिन उसकी अंतिम सूची सबसे देर से तैयार होती है।
कांग्रेस में इस संबंध में पहले दौर की मंत्रणा शुरू हो चुकी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद दो दिनों तक प्रदेश के शीर्ष नेताओं से चर्चा करते रहे।
इस दौरान राज्य के बिजली मंत्री आर्यदन मोहम्मद, जिनका कांग्रेस में काफी ऊंचा कद हैं और पांच दशकों से पार्टी से जुड़े हुए हैं, ने आईएएनएस को बताया कि उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है।
यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी जगह उनके बेटे आर्यदन शौकत को मल्लपुरम जिले की उनकी पारंपरिक सीट नीलाम्बर से टिकट दिया जाएगा, उन्होंने हंसते हुए कहा, “क्या आप नहीं जानते कि हमारी पार्टी में टिकट काटने और उम्मीदवार बदलने का चलन है। इसलिए अभी इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी।”
कांग्रेस के तीन बार विधायक रहे एम.ए. वहीद, जो काझाकूटम निर्वाचन क्षेत्र से जीते हैं, का कहना है कि इस बार उनके लिए चुनाव जीतना काफी कठिन है, क्योंकि मुकाबला त्रिकोणीय है।
माकपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व उद्योग मंत्री एलामारम करीम, जो दो बार विधायक रह चुके हैं, ने आईएएनएस से कहा कि वे अपने पोलित ब्यूरो सदस्य पिनरई विजयन के नेतृत्व में प्रस्तावित पार्टी की रैली रविवार को खत्म होने के बाद उम्मीदवार चयन के मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
2011 के चुनाव में कांग्रेस ने 82 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे, जिसमें से 38 पर उसे जीत हासिल हुई थी। जबकि माकपा ने 92 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 44 सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि भाकपा ने 27 सीटों पर लड़कर 13 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेसनीत यूडीएफ गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 24 सीटों पर चुनाव लड़कर 20 सीटें हासिल की। केरल कांग्रेस (मणि) ने 15 सीटों पर चुनाव लड़ा और नौ सीटें जीती थी।
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