चेन्नई, 4 जून (आईएएनएस)। देश के एक शीर्ष वैज्ञानिक का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण केवल नियमों से संभव नहीं है।
एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक एम. एस. स्वामीनाथन ने कहा, “वन्यजीव संरक्षण तभी संभव है, जब शिक्षा, सामाजिक लामबंदी एवं नियम पर एक साथ ध्यान दिया जाए।”
उन्होंने एक बयान में कहा, “हमारे देश में एक सींग वाले गैंडे और बाघ जैसे बहुमूल्य वन्यजीवों का वजूद उनके व्यापारिक मूल्य की वजह से खतरे में है।”
मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम में 1972 में हुए संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन के बाद से हर साल पांच जून ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
हर साल इस दिवस के उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस वर्ष की थीम है ‘गो वाइल्ड फॉर लाइफ’ है। इसका मकसद खतरे में पड़ी सभी प्रजातियों के प्रति रुचि बढ़ाना और वज्यजीवों के अवैध कारोबार को जरा भी बर्दाश्त नहीं करने को बढ़ावा देना है।
स्वामीनाथन ने कहा कि असम एवं पड़ोस के इलाकों में एक सींग वाले गैंडों की आबादी कम हो रही है, क्योंकि सींग के लिए ही उनका शिकार किया रहा है।
केवल दंड देने से इच्छित परिणाम नहीं मिलेगा। यही कारण है कि नियमों के साथ शिक्षा एवं सामूहिक प्रयास भी होना चाहिए।
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