केवल 0.08 प्रतिशत भारतीय अंगदाता

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। केवल 0.08 प्रतिशत भारतीय ही जरूरतमंदों को अपने अंगदान करते हैं, जबकि स्पेन और बेल्जियम में यह संख्या 70-80 प्रतिशत है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने 13 अगस्त को अंगदान दिवस के मौके पर शनिवार को यह बात कही।

विशेषज्ञों के मुताबिक, हर साल भारत में दो लाख लोगों को नए गुर्दे की और एक लाख लोगों को लिवर की जरूरत होती है, लेकिन इनमें से केवल दो-तीन प्रतिशत जरूरतमंदों की ही जरूरतें पूरी हो पाती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीयों में अंगदाताओं की निम्न संख्या का कारण अज्ञानता, अंधविश्वास और अनुकूल नियामक ढांचे का अभाव है।

सरोज सुपरस्पेश्येलिटी हॉस्पिटल के ‘सेंटर फॉर लिवर ट्रांसप्लांट एंड गैस्ट्रोसाइंसेज’ के निदेशक रविंद्र मल्होत्रा ने कहा, “यह त्रासदीपूर्ण है कि इतने प्रचार के बावजूद भारत अंगदान के मामले में इतना पीछे है। पिछले कई वर्षो में भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।”

उन्होंने कहा, “माता-पिता की अनुमति से बच्चों को भी अंगदाता बनाया जा सकता है। अंगदान की पूरी अवधारणा को और ज्यादा समझाने और इसका प्रचार करने की जरूरत है।”

मल्होत्रा ने कहा कि अंगदान को बढ़ावा देने के लिए कानूनों में भी बदलाव लाना जरूरी है।

कुछ चिकित्सकों ने कहा कि पश्चिमी देशों में मृत नागरिक के शव पर राज्य का अधिकार होता है, जो कि उसके अंग संरक्षण और दान से जुड़े फैसले ले सकता है।

दिल्ली के एक डॉक्टर पी. के. भारद्वाज ने कहा कि इसके विपरीत भारत में अंगदान की शपथ ले चुके मृतक के परिजनों की सहमति जरूरी है, जो कि कई मामलों में नकारात्मक होती है।

नई दिल्ली स्थित एम्स के ‘ऑर्गन र्रिटीवल बैंकिंग ऑर्गनाइजेशन’ के मुताबिक, 2010 के बाद से देशभर में 22,500 लोगों ने अपनी मौत के बाद अपने अंगदान करने के लिए पंजीकरण कराया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान को बढ़ावा देने के लिए धर्मगुरुओं को आगे आना चाहिए, क्योंकि ज्यादातर लोग धार्मिक अंधविश्वासों के कारण अंगदान से बचते हैं।

एम्स की वरिष्ठ डॉक्टर भवदी शर्मा ने कहा, “लोगों को अंगदान को भी उसी प्रकार स्वीकार करना चाहिए, जिस प्रकार उन्होंने रक्तदान को स्वीकार किया है। इसमें समय लगेगा, लेकिन निकट भविष्य में यह जरूर होगा।”

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