नई दिल्ली, 20 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कॉरपोरेट कर छूट समाप्त करने और कॉरपोरेट कर को वर्तमान 30 फीसदी से घटा कर 25 फीसदी तक लाने की कार्ययोजना प्रस्तुत की।
एक सरकारी बयान में कहा गया, “यह कर कानून के सरलीकरण की दिशा में एक कदम है, जिससे पारदर्शिता और स्पष्टता आएगी।”
बयान में कहा गया है, “लाभ संबद्ध, निवेश संबद्ध और क्षेत्र आधारित कटौती को कॉरपोरेट और गैर-कॉरपोरेट करदाता दोनों के लिए हटाया जाएगा। इसे समाप्त करने की तिथि को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।”
जिन छूटों के समाप्त होने की कोई तिथि निर्धारित नहीं है, उनके लिए 31 मार्च, 2017 की तिथि तय की जाएगी।
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने वर्तमान कारोबारी साल के आम बजट में कहा था, “कर छूट की व्यवस्था के कारण दबाव समूह, मुकदमेबाजी और आय की क्षति की स्थिति पैदा हुई है। इसलिए मैं अगले चार साल में कॉरपोरेट कार को 30 फीसदी से घटाकर 25 करने का प्रस्ताव रखता हूं।”
उन्होंने कहा, “कर घटाने की इस प्रक्रिया के साथ अनिवार्य तौर पर सरलीकरण और विभिन्न प्रकार की कर छूट की समाप्ति भी की जाएगी, संयोग से जिनकी वजह से बड़ी संख्या में कर विवाद चल रहे हैं।”
वित्तमंत्री के मुताबिक, 30 फीसदी आधारभूत कॉरपोरेट कर अन्य प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले अधिक है, जिसके कारण घरेलू उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता घटती है।
प्रभावी कर हालांकि 23 फीसदी रह जाता है।
जेटली ने कहा, “हम दोनों मोर्चो पर घाटे में रह जाते हैं। हमें अधिक कर वाला देश समझा जाता है और विभिन्न कर छूटों के कारण हकीकत में हमें उतना कर मिल भी नहीं पाता है।”
इस विषय में हितधारकों से 15 दिनों के भीतर सुझाव मांगे गए हैं।
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