नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टड्रो ने जिस तरह से ओटावा में वर्ष 1914 की कोमागाटा मारू की घटना के लिए हाउस ऑफ कॉमन्स (संसद) में माफी मांगी भारत ने शनिवार को उसकी सराहना की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने एक बयान में कहा, “हम कनाडा के प्रधानमंत्री ने कोमागाटा मारू की घटना के लिए जिस तरह औपचारिक रूप से हाउस ऑफ कामन्स (संसद) में माफी मांगी है हम उस भाव का हार्दिक स्वागत एवं सराहना करते हैं।”
उन्होंने कहा, “भारतीय प्रवासियों ने कनाडा के निर्माण और विकास में बहुत अधिक योगदान किया है। साथ ही दोनों देशों के बीच जोड़ के रूप में भी काम किया है। प्रधानमंत्री टड्रो का यह भाव प्रदर्शन भारतीय समुदाय की सकारात्मक भूमिका को स्वीकार करना दर्शाता है।”
कोमागाटा मारू एक जापानी पोत था जिसे मलेशिया के एक धनी सिख बाबा गुरदीत सिंह ने 1914 के नस्ली कानूनों को चुनौती देने के लिए 376 भारतीयों को (जिनमें अधिकतर सिख थे) कनाडा लाने के लिए किराये पर लिया था।
उन दिनों भारत और कनाडा दोनों पर ब्रितानी शासन था। तब भारतीयों को कनाडा में घुसने के लिए अधिकार होना चाहिए था। लेकिन तत्कालीन कनाडा सरकार ने भारतीयों को कनाडा में घुसने से रोकने के लिए कई कानूनी प्रावधान कर रखे थे।
भारतीयों के साथ कोमागाटा मारू 23 मई 1914 को वैंकूवर बंदरगाह पर पहुंचा था लेकिन दो महीने बाद जबरन उसे भारत वापस भेज दिया गया था। जब वह सितंबर में कोलकाता के बजबज पहुंचा तो ब्रितानी भारतीय पुलिस ने उस पोत के यात्रियों पर फायरिंग कर दी। उस घटना में 19 यात्री मारे गए।
उस घटना के लिए बुधवार को हाउस ऑफ कामन्स में क्षमा मांगते हुए टड्रो ने कहा, “बगैर किसी सवाल के कनाडा की सरकार उन कानूनों के लिए जिम्मेदार थी जिसने शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित ढंग से यहां आकर बस रहे यात्रियों को रोका था। उसके लिए और उन सभी खेदजनक परिस्थितियों के लिए हम दुखी हैं।”
स्वरूप ने शनिवार को अपने बयान में कहा, “टड्रो का यह भाव कनाडा की बहुलतावादी एवं बहुसांस्कृतिवाद के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसे भारत पूरी तरह साझा करता है।”
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