नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। कोयला ब्लाक आवंटन मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे तथा अन्य तीन अन्य को शुक्रवार को जमानत मिल गई।
यह मामला कैस्ट्रॉन टेक्नोलॉजी लिमिटेड को कोयला ब्लॉक आवंटन से संबद्ध है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश भरत पराशर ने दिलीप को जमानत दी। वह 1999 की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार में कोयला राज्य मंत्री थे।
अदालत ने इस मामले में कोयला मंत्रालय के तत्कालीन अतिरिक्त सचिव प्रदीप कुमार बनर्जी, कोयला मंत्रालय के तत्कालीन परियोजना सलाहकार नित्यानंद गौतम और कैस्ट्रॉन टेक्नोलॉजी के निदेशक महेंद्र कुमार अगरवाला को भी जमानत दे दी।
इन चारों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने पहली अप्रैल का दिन तय किया है।
ये चारों 18 जनवरी को जारी किए गए सम्मन का पालन करने के लिए अदालत में उपस्थित हुए थे।
इस मामले में कैस्ट्रॉन टेक्नॉलजी और कैस्ट्रॉन माइनिंग नाम की कंपनियां भी आरोपी हैं, जिनका प्रतिनिधित्व अधिकृत प्रतिनिधियों ने किया।
दिलीप एनडीए सरकार के पहले मंत्री हैं जिन्हें कोयला आवंटन मामले में बतौर आरोपी सम्मन जारी किया गया।
यह मामला झारखंड के गिरिडीह जिले के ब्रह्माडीहा ब्लॉक के आवंटन से संबंधित है, जिसे 1999 में कैस्ट्रॉन टेक्नॉलजी को दिया गया था।
इन मामले के आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी तथा आपराधिक विश्वासघात के मामले दर्ज किए गए हैं।
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