खजुराहो में ‘टपरा टॉकीज’ बना आकर्षण का केंद्र (फोटो सहित)

खजुराहो, 20 दिसंबर (आईएएनएस)। स्थापत्य कला के अनुपम मंदिरों की नगरी खजुराहो इन दिनों फिल्मी दुनिया और रंगमंच की दुनिया के लोगों के रंग में रंगा हुआ है। यहां सबसे बड़ा आकर्षण ‘टपरा टॉकीज’ है। कई दशकों पहले इस तरह के टॉकीज हर मध्यम और छोटे शहरों में हुआ करते थे।

खजुराहो में इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव चल रहा है। देश और दुनिया की फिल्मों के प्रदर्शन के लिए यहां भव्य सभागार या टॉकीज या सिनेप्लेक्स तो है नहीं, लिहाजा बांस, बल्ली और त्रिपाल आदि की मदद से चार ‘टपरा टॉकीज’ बनाए गए हैं। इन ‘टपरा टॉकीजों’ को भव्य और आकर्षक रूप दिया गया है।

संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 17 दिसंबर से शुरू हुआ है और यह 23 दिसंबर तक चलेगा। टपरा टॉकीज में मंगलवार को किसानों से संबंधित फिल्म ‘जय किसान’ का प्रदर्शन किया गया।

इसी तरह एक अन्य टपरा टॉकीज में लघु फिल्म ‘रोशनी एक जिंदगी’ का प्रदर्शन हुआ। इस फिल्म के निर्देशक राजदीप चौबे और निर्माता धीरेंद्र कबीर हैं। यह फिल्म भ्रूण हत्या पर बनी है। इस फिल्म के सहयोगी निर्देशक जगदीश शिवहरे हैं।

आयोजकों की ओर से जारी बयान के अनुसार, टपरा टकीज के उद्घाटन अवसर पर किसान नेता गोविंद सिंह टुरिया, फिल्म अभिनेत्री सुष्मिता मुखर्जी, राजा बुंदेला ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के मनोहर खुशलानी ने किसानों के लिए जल के महत्व का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया। आयोजन स्थल पर किसानों को विविध जानकारियां देने वाले स्टल भी लगाए गए हैं, जहां कृषि यंत्रों तथा खेती-किसानी से संबंधित सामग्री व साहित्य उपलब्ध कराया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में बीते तीन दिनों फिल्म निर्देशक शेखर कपूर, रमेश सिप्पी, मनमोहन शेट्टी, गोविंद निहलानी, प्रोड्यूसर गिल्ड के कुलदीप मक्कड़, अभिनेता गोविंद नामदेव, नीता वशिष्ट, सुष्मिता मुखर्जी, भारती आचरेकर आ चुके हैं।

संस्कृति विभाग के उपसंचालक राहुल रस्तोगी ने बताया है कि शासन फिल्म महोत्सव के माध्यम से पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं तलाश रहा है।

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