आगरा, 20 मई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने गंगा जल पाइपलाइन के रास्ते में आ रहे 234 पेड़ों की कटाई के क्षतिपूर्ति के तौर पर फिरोजाबाद जिले में एक बाड़े वाले क्षेत्र में उत्तर प्रदेश जल निगम को 2,500 पौधे लगाने व इनका दस साल तक के लिए रखरखाव करने का निर्देश दिया है। गंगा जल पाइपलाइन से ताज शहर आगरा को जल की आपूर्ति की जाएगी।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का विवरण रविवार को उपलब्ध कराया गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने 234 पेड़ों के काटने के प्रस्ताव पर सर्वोच्च न्यायालय से मंजूरी को अपनी उपलब्धि बताया। गंगा जल पाइपलाइन बुलंदशहर की पलरा झाल नहर से आगरा को पानी की आपूर्ति करेगी।
यह 3,000 करोड़ रुपये की परियोजना पांच किमी के एक खंड को छोड़कर करीब-करीब पूरी हो गई है। इस खंड में 234 हरे पेड़ का मुद्दा बना हुआ था।
आगरा में पर्यावरण कार्यकर्ता, योगेंद्र उपाध्याय पर ‘आधा सच’ बोलने का आरोप लगा रहे हैं।
कार्यकर्ता श्रवण कुमार सिंह ने आईएएनएस से कहा, “सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश जल निगम से वन विभाग से मंजूरी प्राप्त करने के लिए कहा है और केवल ऐसे पेड़ों को काटने के लिए कहा है जो पाइपलाइन बिछाने के लिए बिल्कुल जरूरी हैं।”
शीर्ष अदालत के आदेश में उल्लेख है कि जहां भी संभव हो, काटे जाने वाले पड़ों को ‘जड़ से निकाला जाए और पाइप लाइन बिछाने के बाद उसी जगह पर पेड़ को लगा दिया जाए।’
आदेश में कहा गया है कि शेखुपुरा गांव में क्षतिपूर्ति के रूप में पौधारोपण के लिए के लिए चिन्हित 2.5 हेक्टेयर जमीन पर परियोजना अधिकारियों द्वारा 30 जून 2018 से पहले दो फीट ऊंची बाड़ लगाई जानी चाहिए और वन विभाग को पेड़ लगाने के कार्य के लिए सौंपा जाए।
अदालत ने कहा कि अनुमति दिए जाने से पहले 2,500 पौधे लगाने की कीमत व अगले 10 सालों के रखरखाव की कीमत वन विभाग के एक अलग खाते में जमा करनी होगी।
गंगा जल पाइपलाइन के लिए पेड़ों की कटाई पर आपत्ति शुरू में परिस्थितिकीय वकील एम.सी. मेहता की तरफ से आई। इनकी याचिका पर न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर व न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता द्वारा सुनवाई हो रही है।
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