नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। डॉ. गिरीश साहनी ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के महानिदेशक और विज्ञान तथा तकनीकी मंत्रालय के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के सचिव पद का कार्यभार संभाल लिया है।
डॉ. साहनी इससे पहले सीएसआईआर- सूक्ष्म जीव प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-इमटेक), चंड़ीगढ़ में निदेशक के पद पर थे।
उन्होंने 1991 में सीएसआईआर-इमटेक में कार्य शुरू किया था और 2005 में वह इसके निदेशक बने।
दो मार्च, 1956 को जन्मे डॉ. साहनी ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरू से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। पीएचडी करने के बाद उन्होंने केलिफोर्निया, सांता बारबरा, सीए, अमेरिका के विश्वविद्यालय में 1984-86 तक डॉक्टरेट के बाद प्रशिक्षु, राकेफेलर विश्वविद्यालय न्यूयॉर्क, अमेरिका में 1986-1988 तक वरिष्ठ अनुसंधान सहभागी और अनुबंध प्राध्यापक तथा 1987-1991 तक अल्बर्ट आइंस्टाइन कॉलेज ऑफ मेडिसन, न्यूयॉर्क में वरिष्ठ अनुसंधान सहभागी के रूप में काम किया।
डॉ. साहनी की विशेषज्ञता प्रोटीन इंजीनियरिंग, आणविक जीव विज्ञान और जैव प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में है। उन्होंने प्रोटीन हृदयवाहिनी औषधि विशेष रूप से ‘खून का थक्का हटाने (क्लॉट बस्टर्स)’ और मानव शरीर पर इनके असर करने के तरीके के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उनके नेतृत्व में एक टीम ने देश में पहली बार खून का थक्का हटाने की औषधि के निर्माण की तकनीक शुरू की, जिसे प्राकृतिक स्ट्रेपटोकाइनेज (ब्रांड नाम ‘एसटीपेस’ के तहत केडिला फॉर्मास्युटिकल्स लिमिटेड, अहमदाबाद द्वारा बाजार में लाया गया) और दोबारा मिश्रित स्ट्रेपटोकाइनेज (शसुन ड्रग्स, चेन्नई द्वारा निर्मित) और ‘क्लॉटबस्टर’ (एलेम्बिक) तथा ‘लुपिफ्लो’ (लुपिन) जैसे कई ब्रांड नाम से बाजार में उतारे गए।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डॉ. साहनी अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान की वजह से जाने जाते हैं। उच्च श्रेणी के वैज्ञानिक पत्रों में उनके द्वारा लिखित कई पत्र प्रकाशित हुए हैं और उनके पास कई अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पेटेंट हैं।
वह भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, नई दिल्ली, भारतीय विज्ञान अकादमी, बेंगलुरू य एनएएसआई, इलाहाबाद भारतीय जीवाणुतत्ववेत्त संगठन से जुड़े हुए हैं और वह गुहा अनुसंधान सम्मेलन के सदस्य हैं।
डॉ. साहनी के योगदान के लिए उन्हें प्रदान किए गए पुरस्कारों में से सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी उत्पाद पुरस्कार 2002, सीएसआईआर टैक्नोलॉजी शील्ड 2001-2002, वासविक औद्योगिक पुरस्कार 2000, औषधि विज्ञान में रेनबैक्सी पुरस्कार 2003, विज्ञान रत्न सम्मान 2014, ओमप्रकाश भसीन पुरस्कार 2013 और व्यवसाय विकास एवं टैक्नोलॉजी मा*++++++++++++++++++++++++++++र्*टिंग के लिए सीएसआईआर टैक्नोलॉजी पुरस्कार, 2014 शामिल हैं।
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