गुजरात : गिरफ्तार संदिग्ध आतंकवादी 12 दिन की पुलिस हिरासत में

अहमदाबाद, 27 फरवरी (आईएएनएस)। यहां एक स्थानीय अदालत ने गुजरात आतंकवाद-रोधी दस्ते (एटीएस) द्वारा गिरफ्तार दो संदिग्ध आतंकवादियों को सोमवार को 12 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

भारत के ही रहने वाले दोनों संदिग्ध आतंकवादियों को रविवार को गुजरात एटीएस ने राजकोट और भावनगर से गिरफ्तार किया था।

पुलिस का कहना है कि दोनों संदिग्ध आतंकवादी- वसीम रामोदिया और नईम रामोदिया- भाई हैं और गुजरात में जल्द ही आतंकवादी हमला करने की साजिश रच रहे थे।

वसीम ने एमसीए और नईम ने बीसीए तक की शिक्षा हासिल की है। दोनों अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के संपर्क में थे। पुलिस के अनुसार दोनों एक पहाड़ी पर स्थित मशहूर चोटिला मंदिर अन्य स्थानों पर आतंकवादी हमला करने वाले थे।

न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने दोनों संदिग्ध आतंकवादियों को 12 दिन के लिए 10 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस सूत्रों का दावा है कि दोनों संदिग्ध आतंकवादियों ने स्वीकार किया है कि वे सौराष्ट्र में विभिन्न जगहों पर विस्फोट करने के उद्देश्य से बम बनाने वाले थे।

एटीएस के पुलिस उपाधीक्षक आर. डी. फालदू ने कहा, “अब हम उनसे अच्छी तरह पूछताछ करेंगे ताकि सारा मामला सामने आ सके कि वे अकेले हैं या राज्य में अन्य युवाओं के संपर्क में भी हैं, विस्फोटक तैयार करने के लिए उन्होंने सामग्री कहां से हासिल की और उनका पूरी योजना क्या थी।”

एटीएस ने दोनों संदिग्धों के पास से 98 ग्राम बारूद, दो नकाब, बम बनाने में काम आने वाली एक बैट्री और दर्जन भर अविकसित बम बरामद किए। इसके अलावा पुलिस ने दोनों के पास से आईएस की पत्रिका ‘दबिक’ के आठ अंक भी बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार उनके पास से मिले दो लैपटॉप में बम बनाने और छापामार हमला करनी पद्धति वाला वीडियो भी मिला है।

संदिग्ध आतंकवादियों के पास से मिले स्मार्टफोन में मुफ्ती कासिम के 173 भाषण पाए गए। उल्लेखनीय है कि मुफ्ती कासिम को आईएस से संबंध होने के आरोप में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश के हरदोई से गिरफ्तार किया था।

स्थानीय अदालत के सभी वकीलों ने दोनों संदिग्ध आतंकवादियों का मुकदमा लड़ने से इनकार कर दिया, जिसके चलते बिना पैरवी के अदालत ने उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया।

इस बीच मामले ने राज्य में राजनीतिक रंग पकड़ लिया है और गुजरात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शंकर सिंह वाघेला ने आरोप लगाया है कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संरक्षण में ऐसी गतिविधियां सन 2000 से ही जारी हैं।

वाघेला ने कहा, “अगर वे आईएस से 2015 से संपर्क में थे तो उन्हें पहले गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? सरकार का खुफिया विभाग अब तक क्या कर रहा था?”

राज्य सरकार ने हालांकि इन आरोपों से इनकार किया है।

राज्य के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने विधानसभा में कहा, “भाजपा की राष्ट्रवादी सरकार 2002 से इस बात को लेकर प्रतिबद्ध है कि इस तरह की गतिविधियों में लिप्त लोगों को दंडित किया जाए। हमारी पुलिस अतंक की साजिश रचने वालों को पकड़ने के लिए केरल से आजमगढ़ तक जा रही है और उन्हें कानून के तहत न्याय के अंजाम तक पहुंचा रही है।”

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