रायपुर, 16 जुलाई (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ में सूखा राहत का मुआवजा नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। वे प्रदर्शन कर रहे हैं, भूख हड़ताल तक कर रहे हैं। मगर इस बीच चौंकाने वाली खबर यह है कि अधिकारियों ने उन लोगों को सूखा राहत का चेक बांट दिया, जिन्होंने खेती ही नहीं की।
कई लोगों को 10 से 20 हजार रुपये के चेक बांटे गए हैं। वहीं खेती करने वाले किसानों को 30 से 100 रुपये के चेक दिए गए हैं। हाल यह है कि खेती नहीं करने वाले किसान अब सरकार की ओर से मिले मुआवजे के चेक लौटा रहे हैं।
राजस्व विभाग के सचिव के.आर. पिस्दा का कहना है कि सरकारी नियम के अनुसार, ऐसे लोगों को मुआवजा नहीं मिल सकता। अगर अधिकारियों की लापरवाही के कारण बिना खेती किए लोगों को मुआवजा बांटा गया है, तो उसकी जांच की जाएगी। जो भी दोषी अधिकारी हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में हजारों किसानों को बिना खेती किए ही मुआवजा बांटा गया है। लोक प्रहरी रमाशंकर गुप्ता ने सूचना के अधिकार में पूरे मामले का खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि अकेले मनेंद्रगढ़ में ही सैकड़ों किसानों को गलत तरीके से मुआवजा बांट दिया गया। कई जमीन पर मकान और पेट्रोल पंप भी बन गए हैं, लेकिन अधिकारियों ने उनको भी सूखा का मुआवजा बांटा है।
रमाशंकर गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अपनी पैतृक आठ एकड़ जमीन पर खेती नहीं की, लेकिन उनको भी 12 हजार 240 रुपये का चेक दिया गया।
उन्होंने बताया कि सूखा राहत के लिए सरकार की ओर से जो योग्यता तय की गई है, उसमें भारी गड़बड़ी है। सरकारी नियमों के अनुसार सिंचाई के साधन के कारण या फिर खेती नहीं करने के बाद भी जिन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ, उनको राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का मालिक होने के कारण मुआवजा बांटा जा रहा है।
रमाशंकर गुप्ता ने कहा कि जब उनके खेत में किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ तो फिर वे राजनीतिक भीख लेने को तैयार नहीं हैं। इसको देखते हुए उन्होंने सूखा राहत मुआवजा का चेक जिला प्रशासन के अधिकारियों को वापस कर दिया है। जो सरकार किसानों के वास्तविक नुकसान का मुआवजा नहीं दे सकती, उसके द्वारा दिया गया चेक लेने का नैतिक अधिकार नहीं है।
राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 550 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा बांटा गया है। प्रदेश में बारिश कम होने के कारण 117 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, जहां पर प्रति किसान को औसतन 1900, 2 हजार, से 6 हजार तथा कुछ स्थानों में 9 हजार रुपये सरकार की तरफ से सूखा राहत के तौर पर मिले हैं।
डौंडीलोहारा विधानसभा में 37 हजार 937 किसानों को 18 करोड़ 34 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया, जो औसतन 4 हजार 835 रुपये हुआ, जबकि कोरिया जिले में किसानों को 5 रुपये से 25 रुपये तक का मुआवजा भी बांटा गया, जो सरकारी दावे तथा जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क दिखाता है।
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