नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। पेरिस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन वार्ता शुरू होने से पहले आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने रविवार को कहा कि विकसित देशों से विकासशील देशों को वाजिब जलवायु परिवर्तन वित्तीयन का प्रावधान करने की जरूरत है, न कि चालाकीपूर्ण आकड़ेबाजी की।
उन्होंने ट्विटर पर कहा, “विकसित देशों से विकासशील देशों को वादा के तहत जलवायु परिवर्तन वित्तीयन के वाजिब प्रावधान की जरूरत है न कि चालाकी भरी आकड़ेबाजी की।”
उन्होंने कहा, “विकसित देशों से विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन धनराशि के वाजिब आकार की गणना करने वाली विश्वसनीय, सटीक और सत्यापित की जा सकने योग्य प्रणाली की जरूरत है।”
दास ने कहा कि महत्वपूर्ण है पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी न कि गैर वाजिब मानक, जो विकसित देशों के लिए बाजार का निर्माण करता है और दूसरों के लिए विकास की राह खर्चीला बनाता है।
उन्होंने कहा कि पेरिस स्थित विकसित देशों के थिंक टैंक ऑर्गनाइजेशन फॉर इकॉनॉमिक कॉपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) ने कहा है कि विकसित देशों द्वारा किए जाने वाले जलवायु परिवर्तन वित्तीयन में आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है और एक ही आंकड़े की दो बार गणना कर ली जाती है।
उन्होंने कहा कि पेरू की राजधानी लीमा में विश्व बैंक-अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की हाल की बैठक में भारत ने 2020 तक जलवायु परिवर्तन वित्तीयन में 100 अरब डॉलर जुटाने के लिए प्रारूप बनाने का प्रस्ताव रखा है।
भारत के वित्त मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी की गई एक रपट ‘क्लाइमेट चेंज फाइनेंस, एनालिसिस ऑफ अ रीसेंट ओईसीडी रिपोर्ट : सम क्रेडिबल फैक्ट्स नीडेड’ में कहा गया है कि विकसित देशों को निश्चित रूप से विकासशील देशों को धन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरित कराने चाहिए, ताकि विकासशील देश कार्बन उत्सर्जन घटा सके।
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