नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। भारत में जापान के राजदूत केन्जी हिरामात्सू ने जापान-भारत संबंधों को इस समय सर्वश्रेष्ठ बताते हुए कहा कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने और आतंकवाद के खिलाफ जंग में दक्षिण एशिया का सहयोग करने का इच्छुक है।
हिरामात्सू ने नशीले पदार्थो और अपराध (यूएनएओडीसी) के संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के साथ साक्षात्कार के दौरान कहा कि हालांकि सीरिया और इराक में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट की पकड़ कमजोर हुई है, लेकिन विदेशी आतंकवादी लड़ाके अब दक्षिण एशिया सहित विश्व के अन्य हिस्सों में पैर जमा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “जैसा कि जुलाई में हमने देखा कि ढाका में आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें जापान के सात नागरिकों की मौत हो गई। हम इस स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हैं।”
वह एक जुलाई, 2016 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका की आर्टिसन बेकरी में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख कर रहे थे, जिसमें 18 विदेशी नागरिकों सहित 29 लोगों की मौत हो गई थी।
यह साक्षात्कार यूएनओडीसी वार्ताओं का हिस्सा था, जिसके तहत अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध, मानवाधिकार, आतंकवाद और कानून के शासन जैसे यूएनडीओसी के मुख्य मुद्दों पर प्रख्यात शख्सियतों और विशेषज्ञों के साथ विशेष वार्ता की जाती है।
हिरामात्सू ने कहा कि जापान दक्षिण एशिया की स्थिति को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा, “हिंसक चरमपंथ के मुद्दे से निपटने के लिए हमें एक अधिक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। इसके लिए हमें न सिर्फ आतंकवाद से निपटने पर बल्कि गरीबी उन्मूलन, सौहार्दपूर्ण समुदायों के निर्माण और धार्मिक तनाव कम करने जैसी चुनौतियों से निपटने पर भी ध्यान देना होगा।”
उन्होंने कहा कि जापान दक्षिण एशिया में सीमा नियंत्रण और बेहतर कानून प्रवर्तन के प्रयासों का सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है, विशेष रूप से मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देने और सीमा नियंत्रण और कानून प्रवर्तन मुद्दों से निपटने वालों के तकनीकी सहायता प्रदान कराने के संदर्भ में।
राजदूत ने कहा, “हमारे पास सीमा नियंत्रण और सामुदायिक नियमों के लिए विशेष कार्यक्रम है और हमने इस क्षेत्र में खुफिया जानकारियों और सूचनाओं को साझा करने के लिए एक केंद्र की स्थापना भी की है।”
हिरामात्सू ने कहा, “हम क्षमता निर्माण में यूएनओडीसी के सहयोग के लिए अभियान का समर्थन भी कर रहे हैं, जो यूएनओडीसी के एजेंडे के विभिन्न स्तंभों की आवश्यकता पूरी करता है। यूएनओडीसी के कार्य के तीन स्तंभ स्वास्थ्य, न्याय और सुरक्षा हैं, जो हमारे लिए महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने कहा कि वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य में बदलाव आ रहा है। इन मुद्दों पर अधिक समझदारी से काम करने की जरूरत है।
हिरामात्सू ने कहा, “निस्संदेह परमाणु आतंकवाद का मुद्दा पिछले कई वर्षो से चुनौती बना हुआ है।”
उन्होंने कहा, “हम परमाणु आतंकवाद पर कई बैठकें कर रहे हैं और हम इसमें सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। उत्तर कोरिया के संदर्भ में स्थिति अधिक पेचीदी और गंभीर है। संघर्ष अब नए चरण में प्रवेश कर गया है।”
उन्होंने एसडीजी के मुद्दे पर कहा कि कई देशों द्वारा किए गए सामूहिक प्रयासों से इन्हें हासिल किए जाने की जरूरत है, विशेष रूप से दक्षिण एशिया में।
उन्होंने भारत के साथ जापान के संबंधों के बारे में कहा कि उन्हें यह कहने में खुशी है कि भारत के साथ जापान के संबंध इस समय सर्वश्रेष्ठ हैं।
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