जावड़ेकर ने आाईआईएम जम्मू पर पक्षपात के आरोपों को नकारा

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जम्मू एवं कश्मीर के जम्मू क्षेत्र में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की स्थापना को लेकर ‘पक्षपात’ के नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला के आरोपों को शुक्रवार को खारिज किया।

जम्मू क्षेत्र में आईआईएम की स्थापना को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा गुरुवार को मंजूरी दिए जाने के बाद उमर ने पीडीपी-भाजपा सरकार पर ‘खुलकर पक्षपातपूर्ण राजनीति को आगे बढ़ाने’ और ‘जम्मू एवं कश्मीर में संतुलित क्षेत्रीय विकास को नजरंदाज करने’ का आरोप लगाया था।

इसके बाद शुक्रवार को जावड़ेकर ने कश्मीर घाटी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से उठाए कदमों का उल्लेख किया।

जावड़ेकर ने कहा, “उमर अब्दुला शिक्षा का राजनीतिकरण नहीं करें। आप जानते हैं कि आईआईएम का बाह्य परिसर कश्मीर घाटी में स्थापित होगा।”

62 करोड़ की लागत से बनने वाले भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) का जम्मू में 2020 तक अस्थाई परिसर होगा। बाद में घाटी में इसका एक बाहरी परिसर बनेगा।

घाटी में पिछले तीन माह से भी अधिक समय से जारी बंद की ओर स्पष्ट संकेत करते हुए जावड़ेकर ने कहा, “केंद्र सरकार ने एनआईटी श्रीनगर के आधुनिकीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये जारी किए हैं। आपको (अब्दुल्ला) अकादमिक सत्र जल्द शुरू कराने में मदद करनी चाहिए।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने जम्मू एवं कश्मीर में छात्राओं के सात छात्रावास के लिए 50 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिनमें तीन घाटी में बनेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने इस साल जम्मू एवं कश्मीर के छात्रों के लिए सुपर संख्यात्मक कोटा 2 से बढ़ा कर 10 कर दिया है।

जावड़ेकर ने कहा, “आपको (उमर अब्दुल्ला) साल 2011 से 14 के बीच प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना को व्यवस्थित करना चाहिए था, जो कुप्रबंधित था।”

अब्दुल्ला ने जवाबी हमला करते हुए कहा, “ट्वीट्स के लिए शुक्रिया, लेकिन इनमें से कोई भी आईआईएम और आईआईटी की स्थापना के आपके निर्णय में निहित असंतुलन की भरपाई नहीं करता।”

उन्होंने आगे कहा, “महोदय, आपके अनुसार तो 1947 से 2014 तक पूरा देश कुप्रबंधित था और आप उम्र में मुझसे इतने बड़े हैं कि मैं आपके साथ बहस नहीं कर सकता।”

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