कोलकाता, 6 जुलाई (आईएएनएस)। संपत्ति से संबंधित सलाह देने वाली कंपनी के एक अधिकारी का कहना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण निर्माणाधीन परियोजनाओं में संपत्ति खरीदने वालों पर कर का बोझ बढ़ने की आशंका नहीं है।
आम धारणा यह है कि जीएसटी के तहत लगाए गए 12 फीसदी के कर के चलते संपत्ति पर लगने वाला कर 5.5 फीसदी के पूर्व दर से बढ़ जाएगा।
नाइट फ्रैंक इंडिया कंपनी के मुख्य अर्थशाी और राष्ट्रीय निदेशक (अनुसंधान) समंतक दास ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि जीएसटी के बाद निर्माणाधीन परियोजनाओं में संपत्ति खरीदने वाले लोगों पर कर का बोझ नहीं बढ़ेगा। प्रत्यक्षत: देखें तो जीएसटी के तहत लगाया गया 12 फीसदी का कर, जीएसटी से पूर्व 5.5 फीसदी से पूरे 6.5 फीसदी अधिक है। लेकिन जीएसटी में कई रियायतें भी दी गई हैं।”
देशभर में एक जुलाई से लागू हो चुकी इस अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ग्राहकों को कैसे देना है, इस पर डेवलपर्स अभी काम कर रहे हैं।
दास ने कहा, “हमने डेवलपर्स से बात की और वे अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश कर रहे हैं कि ग्राहकों पर किसी तरह के अतिरिक्त कर का बोझ न पड़े। उम्मीद है कि जीएसटी के कारण संपत्ति खरीदने वालों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।”
दास ने यह भी कहा कि डेवलपर्स को पता है कि ग्राहकों पर अतिरिक्त कर का बोझ डालने का बिक्री पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र को लेकर किए गए अध्ययन ‘इंडिया रियल एस्टेट – रेजिडेंशियल एंड ऑफिस’ की लांचिंग में हिस्सा लेने आए दास ने कार्यक्रम से इतर कहा, “नई परियोजनाओं को लेकर उम्मीद है कि आधार कीमतों में संशोधन होगा, ताकि जीएसटी के बाद घरों की कीमतें जीएसटी पूर्व जैसे ही बने रहें।”
नाइट फ्रैंक इंडिया के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में देश के शीर्ष आठ महानगरों – मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरू, कोलकाता, अहमदाबाद, और नई दिल्ली – में नई परियोजनाओं में 41 फीसदी की कमी आई है, जो बीते सात वर्षो में सबसे बड़ी गिरावट है।
लांच किए गए अध्ययन के मुताबिक, संपत्तियों की बिक्री में भी 2017 की पहली छमाही में वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 11 फीसदी की गिरावट आई है।
dharmpath.com dharmpath